सीतामढ़ी: स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में सुधार के उद्देश्य से सीतामढ़ी जिले में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी रिची पांडे की अध्यक्षता में परिचर्चा भवन में आयोजित इस कार्यशाला में बैरगनिया, सुप्पी, मेजरगंज, रीगा, बेलसंड, परसौनी, बथनाहा, सुरसंड और डुमरा प्रखंडों के प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी, चयनित 40 ग्राम पंचायतों के मुखिया और पंचायत सचिवों ने भाग लिया।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों को स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के क्षेत्रों में सुधार के लिए सशक्त बनाना और उन्हें आवश्यक जानकारी तथा संसाधनों से लैस करना था।
कार्यशाला के मुख्य बिंदु और उद्देश्य
कार्यशाला में पिरामल फाउंडेशन के कार्यक्रम प्रबंधक प्रभाकर कुमार और उनकी टीम के सदस्यों, जिसमें दुर्गा प्रसाद सिंह, रोहित कुमार, अभिषेक राज और बिक्रम कुमार शामिल थे, ने विशेष पहल पर चर्चा की। इन पहलों में शामिल हैं:
- एनीमिया मुक्त पंचायत
- होम डिलीवरी मुक्त पंचायत
- फाइलेरिया मुक्त पंचायत
- ड्रॉप आउट मुक्त पंचायत
- परिवार नियोजन युक्त पंचायत
इन पहलों का उद्देश्य ग्राम पंचायतों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना, बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करना और पोषण से संबंधित समस्याओं को दूर करना है।
ग्राम पंचायत विकास योजना पर जोर
कार्यशाला में ग्राम पंचायत योजना (GPDP) और GPPFT टीम के गठन पर विशेष ध्यान दिया गया। पिरामल फाउंडेशन की टीम ने बताया कि ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले सभी विभागों को एक साथ लाना आवश्यक है।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को इस बात के लिए प्रेरित किया कि वे स्थानीय स्तर पर जागरूकता फैलाने और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने में अपनी भूमिका निभाएं।
जिलाधिकारी का संबोधन
जिलाधिकारी रिची पांडे ने कहा,
“ग्राम पंचायतों को स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण में सुधार के लिए सशक्त बनाना हमारी प्राथमिकता है। हमें उम्मीद है कि इस कार्यशाला से पंचायत प्रतिनिधियों को इन क्षेत्रों में सुधार के लिए आवश्यक जानकारी और कौशल प्राप्त होगा।”
उन्होंने पंचायत स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के लिए नवाचार और नए विचारों को योजना में शामिल करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि पुरानी चुनौतियों और समस्याओं को खत्म करने के लिए हमें नए दृष्टिकोण और रणनीतियों को अपनाना होगा।
प्रखंड स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन
जिलाधिकारी ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रखंड स्तर पर पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठक करें और पिरामल टीम के सहयोग से GPDP के तहत थीम का चयन करें। यह सुनिश्चित करने के लिए कि योजनाएं प्रभावी रूप से लागू हो सकें, पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित और प्रेरित करना आवश्यक है।
विशेषज्ञों का योगदान
कार्यशाला में विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए:
- जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रमोद कुमार साहू ने सरकार द्वारा चलाई जा रही शिक्षा योजनाओं और उनकी चुनौतियों पर चर्चा की।
- जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस) कंचन गिरी ने आंगनवाड़ी केंद्रों पर मिलने वाली सेवाओं और उनकी गुणवत्ता में सुधार के लिए सुझाव दिए।
- सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।
सामुदायिक भागीदारी और पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका

कार्यशाला में उपस्थित पंचायत प्रतिनिधियों को यह समझाया गया कि स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण में सुधार के लिए सामुदायिक भागीदारी कितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने और लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।
कार्यशाला के परिणाम और भविष्य की योजनाएं
इस कार्यशाला के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों को इन क्षेत्रों में सुधार के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश मिले। जिलाधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि यह कार्यशाला केवल शुरुआत है। आने वाले समय में पंचायत स्तर पर और भी कई कार्यशालाओं और बैठकों का आयोजन किया जाएगा ताकि योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू किया जा सके।
निष्कर्ष
सीतामढ़ी में आयोजित यह कार्यशाला एक महत्वपूर्ण पहल थी, जिसका उद्देश्य ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाना और उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में सुधार के लिए सक्षम बनाना था। पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों के सक्रिय सहयोग से यह कार्यशाला सफल रही।
जिलाधिकारी रिची पांडे और पिरामल फाउंडेशन की टीम के प्रयासों से यह उम्मीद की जा रही है कि इस पहल से सीतामढ़ी जिले की ग्राम पंचायतें विकास के नए आयाम स्थापित करेंगी।