बुराई के अहंकार पर अच्छाई की विजय का संदेश मंगलवार को गांधी मैदान में अग्निशिखाओं के बीच जीवंत हो उठा। श्रीराम के बाण चलते ही रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद धू-धूकर जल उठे।
आसमान में उठती आग की लपटों और गूंजते जय श्रीराम के जयकारों के बीच गांधी मैदान में जुटे लाखों लोगों ने विजयादशमी के इस भव्य आयोजन का साक्षी बनने का आनंद लिया।
श्री दशहरा कमिटी की ओर से आयोजित रावण दहन कार्यक्रम का उद्घाटन राज्यपाल सैयद अता हसनैन, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और अन्य गणमान्य अतिथियों ने किया।
मंच पर मौजूद अतिथियों ने धनुष से बाण चलाकर दहन की परंपरा निभाई। प्रतीकात्मक बाणों के प्रहार के साथ ही तीनों विशाल पुतलों में आग लग गई।
कुछ ही देर में 90 फीट ऊंचा रावण, 85 फीट का कुंभकर्ण और 80 फीट का मेघनाद आग की लपटों से घिर गए और पूरा मैदान जयश्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
इस बार रावण दहन में आतिशी प्रभाव और लाइट-साउंड की विशेष सज्जा आकर्षण का केंद्र रही। रावण की आंखों से अंगारे निकलते दिखे तो उसके मुंह से उठती आग की लपटों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
मैदान में मौजूद वानर सेना के सदस्य लगातार जयश्रीराम के उद्घोष करते रहे। जैसे ही तीनों पुतले जलने लगे, दर्शकों के बीच उत्साह बढ़ गया। तालियों और जयकारों के बीच लोगों ने इस दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया।
रावण दहन के दौरान गांधी मैदान में उत्सव और उल्लास का माहौल रहा। हजारों दर्शकों ने मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट जलाकर इस पल को यादगार बनाया।
बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में पुतलों के दहन को लेकर उत्साह दिखा। विशाल पुतलों को आग की लपटों में घिरते देख लोग देर तक जयकारे लगाते रहे।
लाखों लोगों की भीड़ को देखते हुए गांधी मैदान में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए गए थे। मैदान के चारों ओर सौ से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, ताकि लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।
कार्यक्रम का मंच संचालन सोमा चक्रवर्ती ने किया। मौके पर श्री दशहरा कमिटी के अध्यक्ष अरुण कुमार, चेयरमैन कमल नोपानी समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
