जीवन में अच्छा और बुरा वक्त कभी भी आ सकता है और कई बार लोगों को आपकी मदद की जरूरत भी हो सकती है। कई बार आपको आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है और ऐसा माना जाता है कि जो जरूरत में काम आए वही आपका सच्चा मित्र हो सकता है।
कई बार आप ऐसे किसी व्यक्ति की मदद करते हैं जिसने जीवन में कभी आपका अपमान किया हो। ऐसे व्यक्ति का कोई भरोसा नहीं होता है और उनकी मदद करने से वो कभी भी आपका फिर से अपमान कर सकते हैं।
जिस व्यक्ति ने पहले कभी भी आपकी बेइज्जती की हो, उससे न तो मदद लेनी चाहिए और न ही मदद करनी चाहिए।
अगर किसी व्यक्ति का स्वभाव ठीक नहीं है तो आपको भूलकर भी उसकी मदद नहीं करनी चाहिए। दुष्ट व्यक्ति की मदद करना आपके लिए नुकसानदेह हो सकता है। आचार्य चाणक्य ने होनी नीतियों में बताया है कि आपको कभी भी बुरे स्वभाव के लोगों की मदद नहीं करनी चाहिए। ऐसे लोग न तो आपकी मदद से प्रसन्न होते हैं और न ही आपकी मदद का कोई एहसान मानते हैं।
ऐसे लोग जो हमेशा परेशान रहते हैं और अपनी परेशानियों का रोना रोते हैं उनकी मदद आपको भूलकर भी नहीं करनी चाहिए। आचार्य चाणक्य बताते हैं कि इस तरह के लोग आपकी मदद के बाद भी संतुष्ट नहीं होते हैं और बार-बार किसी न किसी बहाने से आपकी मदद लेते रहते हैं और आपके सामने अपना रोना रोते रहते हैं।
कई लोगों का जन्मजात स्वभाव ही मूर्खता से भरा होता है। ऐसे लोगों की अगर आप मदद करते हैं, तो ये लोग अपने ऐसे स्वभाव की वजह से बार-बार धोखा खाते हैं और आपकी मदद लेने के लिए तैयार रहते हैं। आचार्य चाणक्य के अनुसार, आपको कभी भी ऐसे लोगों की मदद नहीं करनी चाहिए। वहीं आपको बातूनी स्वाभाव के लोगों की मदद करने से भी बचना चाहिए। ये लोग भी आपकी मदद को भूल जाते हैं और अपने बड़बोले स्वभाव के कारण बार-बार धोखा खाते हैं।
अगर आप भी इनमें से किसी भी गुण वाले व्यक्ति की मदद करते हैं, तो आपको कई बार सोचना चाहिए।
