बिहार के गानों का नाम लेते ही अगर आपके दिमाग में सबसे पहले सिर्फ लॉलीपॉप लागेलू आता है, तो शायद आप यहां के लोकगीतों के बारे में नहीं जानते। यहां के लोकगीतों में झिझिया गीत शामिल है, जो झिझिया नृत्य से ही जुड़ा है।
इस गीत के जरिए महिलाएं लोक देवता ब्रह्म बाबा को याद करती हैं और उनसे अपनी संतान और अपनी रक्षा के लिए विनती करती हैं। इस गीत की शुरुआत में महिलाएं कहती हैं कि हे ब्रह्म बाबा! हमने आपके ही भरोसे ये झिझिया बनाया है।
झिझिया यानी छेद वाला मटका, जिसे सिर पर रखकर झिझिया नृत्य किया जाता है। आगे महिलाएं कहती हैं कि हम नासमझ हैं और आपकी संतान हैं। आप इस झिझिया पर सवार होकर हमारी रक्षा करें।
इस झिझिया गीत को संवाद की शैली में बनाया गया है, जिसमें सवाल-जवाब सुनने को मिलता है। महिलाएं इस गीत में पूछती हैं कि हरा सुग्गा यानी तोता कहां से आएगा और भैया कहां से आएंगे? जब वो आएंगे, तो मैं उनके साथ झिझरी खेलूंगी।
इसके बाद महिला कहती है कि हरा सुग्गा ससुराल से आएगा और भाई मायके से। जब ये आएंगे, तो मैं उनके साथ मिलकर झिझरी खेलूंगी। गीत में आगे पूछा जाता है कि सुग्गा को कहां का पानी पिलाऊंगी और भैया को कहां का पानी पिलाऊंगी? इसके जवाब में कहा जाता है कि सुग्गा को झरने का पानी दूंगी और भैया को लोटे का पानी दूंगी और फिर झिझरी खेलूंगी।
झिझिया करने के पीछे की कहानी है कि इस नृत्य को बुरी शक्तियों से बचने के लिए किया जाता है। इस गीत में इसी भाव को आगे जाहिर किया गया है। एक डायन बाबा के पोखर पर मछली मारने जाती है, तो महिलाएं उसे कहती हैं कि चलो ब्रह्म बाबा के पास चलो और लोक देवता ब्रह्म बाबा उस बुरी शक्ति से लड़ते हैं और उसे हरा देते हैं।
