मधुबनी, 9 सितंबर 2026। मिथिला की समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने जा रही है। भारत निर्वाचन आयोग ने आधिकारिक प्रयोजन के लिए मधुबनी चित्रकला संस्थान से 50 मधुबनी पेंटिंग्स उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। आयोग ने ऐसी कलाकृतियों को प्राथमिकता देने को कहा है, जिनमें मधुबनी की पारंपरिक कला, संस्कृति और समृद्ध विरासत की स्पष्ट झलक दिखाई दे।
भारत निर्वाचन आयोग के प्रोटोकॉल अधिकारी की ओर से भेजे गए पत्र के माध्यम से इन पेंटिंग्स की व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया है। आयोग की ओर से पेंटिंग्स के चयन में मधुबनी की पारंपरिक कला शैली और सांस्कृतिक विशेषताओं को प्रमुखता देने के निर्देश दिए गए हैं।
स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को प्राथमिकता
आयोग ने पेंटिंग्स की खरीद या प्राप्ति के लिए मधुबनी कला के संरक्षण और संवर्धन से जुड़े स्थानीय कलाकारों एवं शिल्पकारों को प्राथमिकता देने का अनुरोध किया है। इससे जिले के कलाकारों की रचनात्मक प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की संभावना है। साथ ही स्थानीय कला और कलाकारों को प्रोत्साहन मिलने के साथ मधुबनी पेंटिंग के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
निर्देश के अनुसार प्रत्येक पेंटिंग के साथ उसकी विषय-वस्तु और कलात्मक विशेषताओं का संक्षिप्त विवरण अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध कराया जाना है। पेंटिंग्स की आपूर्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित बिल या इनवॉइस के साथ की जाएगी।
राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी मधुबनी पेंटिंग की पहचान
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मधुबनी की पारंपरिक चित्रकला को आधिकारिक प्रयोजन के लिए चुना जाना मिथिला की सदियों पुरानी कला परंपरा के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। यह पहल स्थानीय कलाकारों की रचनात्मकता को व्यापक मंच देने के साथ मधुबनी चित्रकला की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को देशभर में और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मधुबनी की कला को राष्ट्रीय संस्थान के आधिकारिक उपयोग के लिए चुने जाने से स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को अपनी कला के विस्तार और पहचान के लिए नया अवसर मिलने की उम्मीद है।