बिहार सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा माता सीता की जन्मस्थली पुनौराधाम में भव्य और दिव्य सीता मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। यह परियोजना मिथिला ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार और देश-विदेश में फैले माता सीता के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और गर्व का विषय है। इस निर्माण कार्य से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और श्रद्धालुओं में भक्ति, विश्वास एवं समर्पण की भावना और मजबूत हुई है।
हालांकि, इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए पुराने भवनों और संरचनाओं को हटाया जा रहा है। वर्षों से पुनौराधाम की पहचान रहे कई भवन अब इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं। यह परिवर्तन विकास की आवश्यकता भी है और अनेक लोगों के लिए भावनात्मक स्मृतियों से जुड़ा विषय भी।
पर्यटन भवन से जुड़ी यादें
मुख्य प्रवेश मार्ग पर स्थित पुराना पर्यटन भवन लंबे समय से जर्जर हो चुका था। वर्ष 1999 में श्री लक्ष्मी किशोरी महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) का दस दिवसीय विशेष शिविर इसी भवन में आयोजित हुआ था। उस समय स्वयंसेवकों ने पुनौराधाम परिसर और आसपास की सफाई अभियान चलाया था। मंदिर तक जाने वाली कच्ची सड़क और उस समय की व्यवस्थाएं आज भी कई लोगों की स्मृतियों में जीवित हैं।
गायत्री शक्तिपीठ भी विकास की जद में
पुनौराधाम स्थित श्री गायत्री शक्तिपीठ वर्षों तक धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र रहा। यहां यज्ञ, सत्संग, युवा कार्यक्रम और विचार क्रांति अभियान जैसे आयोजन होते रहे। सार्वजनिक सहयोग से बने इस भवन को भी मंदिर परियोजना के लिए हटाया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं में भावनात्मक जुड़ाव की चर्चा है।
स्वास्थ्य केंद्र और अन्य भवन भी हटे
मंदिर परिसर में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, जर्जर सुलभ शौचालय और रीगा चीनी मिल द्वारा निर्मित यात्री निवास भी निर्माण कार्य के चलते हटाए जा चुके हैं। इन भवनों ने वर्षों तक श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की सेवा की।
अतिथि भवन और सीता प्रेक्षागृह अब अतीत का हिस्सा
पर्यटन विभाग का अतिथि भवन, जहां संत, विद्वान और प्रशासनिक अधिकारी ठहरते थे, उसे भी ध्वस्त कर दिया गया। इसी तरह सीतामढ़ी का प्रमुख सभागार माने जाने वाला सीता प्रेक्षागृह भी अब इतिहास बन गया है। यहां धार्मिक कथाएं, यज्ञ, सरकारी कार्यक्रम, सांस्कृतिक आयोजन और सामाजिक समारोह आयोजित होते रहे थे।
यात्री निवास और बाल सीता मंदिर भी प्रभावित
पर्यटकों के लिए निर्मित दो मंजिला यात्री निवास भी परियोजना के दायरे में आकर हटाया गया। वहीं, सीता कुंड के समीप निर्माणाधीन बाल रूप सीता मंदिर को भी भव्य मंदिर परियोजना के लिए हटाना पड़ा।
आस्था और विकास का नया अध्याय
पुनौराधाम में प्रस्तावित भव्य सीता मंदिर को बिहार की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन परियोजनाओं में माना जा रहा है। लगभग एक हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य माता सीता की जन्मस्थली को अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है।
विकास के इस दौर में जहां नई पहचान गढ़ी जा रही है, वहीं वर्षों पुरानी इमारतों और उनसे जुड़ी स्मृतियों को लोग भावुक होकर याद भी कर रहे हैं। श्रद्धालुओं की कामना है कि माता सीता की जन्मभूमि पर बनने वाला यह भव्य मंदिर देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बने।
