वीर भरत भूषण तिवारी को समर्पित
ऊँचे आसन पर बैठे जो,
जिम्मेदारी का बोझ उठाना सीखें।
जाँच की क्या आवश्यकता,
यदि अंतर्मन में थोड़ा भी ईमान शेष हो,
और स्वतंत्रता के दीवानों के प्रति
हृदय में थोड़ा भी सम्मान बचा हो।
वह था डिजिटल युग का विद्रोही,
सिस्टम के तले भी अडिग खड़ा।
जानता था वह सत्य अटल—
मेरे बलिदान के पश्चात ही
उठेगी एक नई क्रांति,
हर घर से जन्मेगा एक ‘भरत’,
तभी भारत बनेगा विश्व-विजेता।
हिंदू राष्ट्र के संकल्प पर अडिग,
वीर भरत ने प्राणों की बाज़ी लगा दी।
नवयुवकों की चेतना जगाने को,
अपनी लौ से दीप जलाए, और मिट गया।
बागेश्वर सरकार की जय
कुंडेश्वर महादेव की जय
