जिले में स्थापित सभी 23 किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को बेहतर प्रदर्शन के लिए किसानों की आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षण उपलब्ध कराने और कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता में गुणोत्तर वृद्धि के लिए बाजार की मांग के अनुरूप खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। मुख्य नोडल पदाधिकारी ने अच्छी प्रभेद के बीज तथा बाजार आधारित उत्पादों की खेती पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने आत्मा (ATMA) को निर्देश दिया कि किसानों के लिए प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम सफल और प्रगतिशील किसानों के खेतों पर आयोजित किए जाएं, ताकि अन्य किसान भी उन्नत कृषि पद्धतियों से सीख ले सकें। साथ ही, आम सहित अन्य बगीचों में ओल और हल्दी की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए जिला उद्यान पदाधिकारी को आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
मुख्य नोडल पदाधिकारी ने रबी 2026 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू होने से पहले किसानों का पंचायतवार सर्वेक्षण कराने का निर्देश जिला सहकारिता पदाधिकारी को दिया। इसके साथ ही जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक को सभी बैंकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना से जोड़ने के निर्देश दिए गए।
जिला पदाधिकारी ने विशेष कैंप आयोजित कर अगले दो महीनों में KCC की संख्या में गुणोत्तर वृद्धि करने पर जोर दिया। उन्होंने जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक को सभी बैंकों के साथ समन्वय करते हुए इच्छुक किसानों को नियमानुसार KCC उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से कार्य करने का निर्देश दिया।
PM-AASHA के तहत अरहर किसानों के पंजीकरण पर जोर
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) योजना के तहत अरहर किसानों का पोर्टल पर पंजीकरण सुनिश्चित कराने के लिए जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव दिया गया। इस संबंध में जिला सहकारिता पदाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
427.5 एकड़ चौर क्षेत्र विकसित, मखाना-मछली पालन का सर्वेक्षण होगा
जिला मत्स्य पदाधिकारी ने जानकारी दी कि जिले में 11 स्थानों पर कुल 427.5 एकड़ चौर क्षेत्र विकसित किया गया है। इस पर मुख्य नोडल पदाधिकारी ने जिले में मखाना और मछली की खेती से संबंधित सर्वेक्षण कर आंकड़े जुटाने तथा इसकी कार्यप्रणाली समेत अन्य पहलुओं का अध्ययन कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
जिला मत्स्य पदाधिकारी को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के सभी घटकों में निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से शत-प्रतिशत पूरा करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना के साथ काम करने को कहा गया। साथ ही मत्स्य पालन करने वाले किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से अधिक से अधिक संख्या में जोड़ने का निर्देश दिया गया।
जलकुंभी से ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की दिशा में पहल
जलजमाव वाले क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर जलकुंभी को ‘वेस्ट टू वेल्थ’ में बदलने की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए त्रिस्तरीय दल को निर्देश दिया गया। दल को अध्ययन के बाद अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा।
कृषि विज्ञान केंद्र, सुखैत, मधुबनी के वरीय वैज्ञानिक ने बताया कि जिला पदाधिकारी के मार्गदर्शन में जलकुंभी से बायो-कम्पोस्ट तैयार करने को लेकर अनुसंधान किया जा रहा है। इस पर मुख्य नोडल पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि बड़े स्तर पर कार्य शुरू करने से पहले तैयार किए जा रहे कम्पोस्ट का प्रमाणीकरण कराया जाए।
इसके साथ ही जलकुंभी से बायो-कम्पोस्ट तैयार करने की प्रक्रिया, उसकी उपयोगिता और संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए जिला मत्स्य पदाधिकारी, सहायक निदेशक रसायन और कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक की त्रिस्तरीय टीम गठित कर अध्ययन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
बैठक में जिला पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, जिला कृषि पदाधिकारी, उप निदेशक कृषि अभियंत्रण सह नोडल पदाधिकारी, जिला पशुपालन पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
