होलका बौद्ध उत्सव को ब्राम्हणों ने विकृत होलिका दहन में परिवर्तित किया|
नीचे के शिल्प में बौद्ध लोग धम्मस्तंभ की पूजा करते दिखाई देते है और उस धम्मस्तंभ के उपर त्रिरत्न रुपी धम्मध्वज है। आज भी लोग धम्मस्तंभ को उंची काठी के रूप में खड़ा कर उसकी पुजा करते थे|होली के दिन बड़ी उंची काठी जमीन पर खडी़ कर लोग उसकी पुजा करते हैं और बाद में खीर पकाने का प्रतीक के रूप में होलका अर्थात होलीका की पवित्र अग्नि जलाते हैं| उसके बाद सुत्तपठन किया जाता था, लेकिन प्रतिक्रांति के बाद ब्राह्मण बनाम श्रमण विवाद बढता गया और वे एकदूसरे को गालियाँ देने लगे और एक दूसरे पर हमले करने लगे जिसे धार्मिक युद्ध (Ritual Combat) कहा जाने लगा था|
होलीका कोई महिला नहीं है, बल्कि होलका शब्द से होलीका शब्द बना है| “होलका” का अर्थ “खीर पकाना” होता है और “होलीका” का अर्थ “खीर पकाने के लिए अग्नि जलाने का उत्सव” ऐसा अर्थ है| अर्थात, “होलीका” मतलब “बौद्ध पुर्णिमा के दिन खीर बनाने का उत्सव” है|
गुप्तोत्तर काल में विकसित सभ्य बौद्ध समाज को असभ्य विकृत समाज बनाने के लिए ब्राह्मणों ने बुद्धिस्ट होलका उत्सव को विकृत होलिका दहन उत्सव में तब्दील किया और सुत्तपठन की जगह गाली-गलौज आरंभ किया, जिससे भारतीय समाज असभ्य पाशवी समाज में तब्दील हो गया।
