पोची पंचायत (प्रखंड): सीमित संसाधनों के बावजूद आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ते हुए हलुमाड़ गांव के सखुआटाड़ टोला निवासी लीलू सिंह अपने परिवार के साथ ऑयस्टर मशरूम की खेती कर प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। पत्नी सरिता देवी और पुत्र ओमप्रकाश सिंह के सहयोग से उन्होंने छोटे स्तर पर शुरू की गई इस पहल को आज स्थानीय बाजार तक पहुंचा दिया है।
लीलू सिंह पेशे से पारा शिक्षक हैं और पोची पंचायत के लोथरवा टोला में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि लगभग डेढ़ वर्ष पहले मोबाइल पर मशरूम उत्पादन से संबंधित एक वीडियो देखने के बाद उनके मन में इस खेती को घर पर शुरू करने का विचार आया। प्रारंभ में सीमित जानकारी और संसाधनों के कारण चुनौतियां जरूर आईं, लेकिन निरंतर प्रयास और सीखने की इच्छा ने उन्हें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया।
परिवार ने घर के एक हिस्से को मशरूम उत्पादन के लिए तैयार किया। नियंत्रित वातावरण, स्वच्छता और नियमित देखभाल के जरिए ऑयस्टर मशरूम की खेती शुरू की गई। धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ा और स्थानीय बाजार में इसकी मांग भी बनने लगी। आज यह परिवार ताजे मशरूम की आपूर्ति कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहा है।
लीलू सिंह का कहना है कि मशरूम की खेती कम लागत में शुरू की जा सकती है और इससे बेहतर मुनाफा संभव है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां कृषि भूमि सीमित है, वहां यह आजीविका का प्रभावी विकल्प बन सकता है। उन्होंने बताया कि परिवार के सामूहिक प्रयास से उत्पादन, पैकेजिंग और बिक्री की पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित रूप से संचालित की जा रही है।
स्थानीय स्तर पर भी इस पहल की सराहना हो रही है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षण का समुचित लाभ मिले, तो इस तरह की पहलें बड़े स्तर पर स्वरोजगार का माध्यम बन सकती हैं।
मशरूम उत्पादन जैसे वैकल्पिक कृषि मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। लीलू सिंह और उनका परिवार इसी दिशा में एक सकारात्मक संदेश दे रहा है कि सीमित साधनों के बावजूद इच्छाशक्ति और परिश्रम से आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है।
