सुरजीत सिंह दीदेवार
स्वयं का स्वामी
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Deedewar Jeevan Jyoti
Patel Nagar New Delhi (India)
दीदेवार दर्शन
स्वः ज्योतिप्रकाशय नम:
दीदेवार नमस्तुभ्यं मन:
स्वयं का स्वामी शरणं:
मैं कौन हूँ
मैं कौन हूँ
मैं चेतना हूँ मैं ही चैतन्य भी हूँ
मैं जीवन हूँ मैं ही मृत्यु भी हूँ
मैं शिशु हूँ मैं ही वृद्ध भी हूँ
मैं जल हूँ मैं ही प्यास भी हूँ
मैं भूख हूँ मैं ही भोजन भी हूँ
मैं वायु हूँ मैं ही श्वास भी हूँ
मैं अग्नि हूँ मैं ही ताप भी हूँ
मैं विकास हूँ मैं ही विनाश भी हूँ
मैं फूल हूँ मैं ही सुगंध भी हूँ
मैं कांटा हूँ मैं ही चुभन भी हूँ
मैं अपने प्रत्येक निर्माण मैं ही हूँ
मैं वस्त्र भी हूँ पहनावा भी मैं हूँ
मैं शास्त्र हूँ मैं शस्त्र भी मैं ही हूँ
मैं सविभान हूँ अभिमान भी मैं हूँ
मैं ईर्ष्या द्वेष प्रेम प्यार सब में मैं हूँ
मैं मन बुद्धि चित्त ह्रदय सब मैं ही हूँ
मैं सभी जगह हूँ मैं हर उम्र में हूँ
मैं मैं भी हूँ जो भी हूँ मैं ही हूँ
मैं से मेरा रिश्ता मैं ही रिश्तेदार हूँ
मैं पति और मैं ही पत्नी हूँ
मैं पिता भी हूँ मैं बेटा भी हूँ
मैं दादा भी हूँ मैं पोता भी हूँ
मैं राजा भी हूँ मैं प्रजा भी हूँ
मैं शिष्य भी हूँ मैं शिक्षक भी हूँ
मैं ही मैं हूँ जहाँ देखूँ वहीं मैं हूँ
मैं गरीब भी हूँ मैं ही धनवान हूँ
मैं मालिक और मैं ही मजदूर हूँ
मैं प्रत्येक अवस्था में मैं ही हूँ
मैं अपने मैं भी मैं ही हूँ
मैं अपने मैं से मुक्त भी मैं ही हूँ
मैं स्वयं को जानने वाला
स्वयं को पहचानने वालामैं ही हूँ
मैं ही मैं पुरे जीवन काल मैं ही हूँ
मैं ही मेरे जीवन का मैं ही स्वामी हूँ
स्वः भवन्तु आनंदमय:
स्वः प्राणन्तु निरामय:
स्वः शरीरन्तु स्वस्थमय:
समस्त प्राणी आत्मीय:
स्वयं को जानों स्वयं को पहचानों
