मधुबनी: सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास को गति देने के लिए वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम-II के तहत मधुबनी जिले में विकास कार्यों को मिशन मोड पर आगे बढ़ाया जा रहा है। जिले के 7 प्रखंडों के 36 चयनित गांवों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने और ग्रामीण आबादी को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विभिन्न विभागों के स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन जारी है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर डीडीसी तुषार कुमार ने वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम-II के तहत विभागवार प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को वर्कप्लान के अनुसार सभी कार्यों को निर्धारित मानक एवं गुणवत्ता के अनुरूप समय पर पूरा करने का सख्त निर्देश दिया।
समीक्षा बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र एवं संतुलित विकास, आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने, स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के अवसर बढ़ाने तथा केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
सीमावर्ती गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना उद्देश्य
डीडीसी ने कहा कि वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम-II का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ इन क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों का विकास केवल सड़क और अन्य आधारभूत संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए।
शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, डिजिटल कनेक्टिविटी, आजीविका, कौशल विकास, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए समेकित रूप से काम किया जाना जरूरी है।
मधुबनी के 7 प्रखंडों के 36 गांव चयनित
वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम-II के तहत मधुबनी जिले के 7 प्रखंडों के 36 गांवों का चयन किया गया है। इनमें बासोपट्टी, हरलाखी, जयनगर, मधवापुर, लदनियां, खुटौना और लौकही प्रखंड शामिल हैं।
बासोपट्टी
खौना, जोंकी, लौठवा, मझौरा
हरलाखी
गंगौर, गोपालपुर, हरलाखी, कमतौल, करुणा, मनोहरपुर, नहरनियां, फुलहर, पिपरौन, उमगांव
जयनगर
बेलही, शिलानाथ, दुल्लीपट्टी, उसराही, देवधा
मधवापुर
बसबरिया, दुर्गापट्टी, हनुमान नगर, लोमा, महुआ, परसा, राम नगर कजरा, सहार
लदनियां
जोगिया
खुटौना
अनहरबन, बंदरझूली, पिपराही, लछमीपुर
लौकही
नारी, थरवाही, हरभंगा, महदेवा, अन्धरामठ, भरफोरी
स्थानीय जरूरतों के आधार पर तैयार होंगी विकास योजनाएं
डीडीसी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि चयनित गांवों की जरूरतों का सूक्ष्म स्तर पर आकलन किया जाए और प्राथमिकता के आधार पर विकास योजनाएं तैयार की जाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गांव की स्थानीय जरूरतों, उपलब्ध संसाधनों और विकास की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का चयन होना चाहिए, ताकि कार्यक्रम का वास्तविक लाभ सीमावर्ती आबादी तक पहुंच सके।
उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम-II के तहत विभिन्न विभागों की योजनाओं का अधिकतम कन्वर्जेंस सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी वाले क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर कार्य कराने पर जोर दिया गया।
रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर
बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। डीडीसी ने कहा कि स्थानीय युवाओं, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों और अन्य सामुदायिक संस्थाओं को योजनाओं से जोड़कर आजीविका के स्थायी अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पलायन को कम करने में भी मदद मिलेगी।
मिथिला कला और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
डीडीसी ने कहा कि मधुबनी अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, मिथिला कला, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थानीय कला, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों की संभावनाओं को चिन्हित कर पर्यटन तथा स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी विशेष फोकस
बैठक में सीमावर्ती गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी चर्चा हुई। डीडीसी ने कहा कि इन गांवों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना और ग्रामीण आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना कार्यक्रम की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को विद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं का आकलन करने तथा आवश्यक सुधार एवं आधारभूत संरचनाओं से जुड़े प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया।
वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम-II के तहत जिले के सीमावर्ती गांवों में योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन से आधारभूत सुविधाओं, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में काम किया जा रहा है।
