सीतामढ़ी, बिहार में राष्ट्र सेविका समिति के उत्तर पूर्व क्षेत्र की ओर से आयोजित पांच दिवसीय घोष प्रशिक्षण वर्ग का समापन जानकी जन्मभूमि पुनौराधाम में हुआ। प्रशिक्षण वर्ग में 10 राज्यों से आईं 52 मातृशक्ति बहनों ने घोष वादन का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन सीतामढ़ी स्थित आंगन विवाह भवन में किया गया था। समापन सत्र पुनौराधाम स्थित सीता मंडपम के समीप आयोजित हुआ। इस अवसर पर माता सीता मंदिर के समक्ष प्रशिक्षित मातृशक्ति बहनों ने घोष वादन प्रस्तुत किया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वंशी, वेणु, त्रिकोण, झल्लरी, आनक और पनव जैसे विभिन्न घोष वाद्य यंत्रों के वादन का प्रशिक्षण दिया गया। पांच दिवसीय प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सभी प्रशिक्षणार्थियों ने सामूहिक रूप से घोष वादन किया।

कार्यक्रम में पुनौराधाम के महंत कौशल किशोर दास ने सभी मातृशक्ति बहनों को अंगवस्त्र प्रदान कर आशीर्वाद दिया। उन्होंने उपस्थित लोगों को माता सीता की जन्मभूमि से जुड़ी कथा भी सुनाई। महंत ने बताया कि माता सीता के जन्म लेते ही 12 वर्ष से चला आ रहा अकाल समाप्त हो गया था।

उन्होंने पुनौराधाम के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र पुण्यारण्य, पुण्यभूमि और पुण्य रस से सिंचित उर्वरा भूमि रहा है, जिसके कारण इसका नाम पुनौराधाम पड़ा। उन्होंने बताया कि सीता कुंड के समीप ही माता जानकी का जन्म हुआ था।

महंत कौशल किशोर दास के आशीर्वाद के बाद ‘सीता संवाद आध्यात्मिक एवं साहित्यिक यात्रा’ के निदेशक आग्नेय कुमार ने प्रशिक्षण वर्ग में शामिल सभी प्रशिक्षकों और प्रशिक्षणार्थियों को ‘सीता जन्मभूमि पंच तीर्थ दर्शन’ पुस्तिका प्रदान की।

समापन कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका सुनीता हल्डेकर और पखिला बोरो, उत्तर बिहार संभाग की राष्ट्र सेविका समिति कार्यवाहिका विनीता सिंह, प्रमुख डॉ. प्रतिमा आनंद सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक मृत्युंजय भारत, विभाग संपर्क प्रमुख आग्नेय कुमार तथा संघ की विभाग कार्यकारिणी के सदस्य उपस्थित रहे।

पांच दिवसीय इस प्रशिक्षण वर्ग के माध्यम से विभिन्न राज्यों से आईं मातृशक्ति बहनों को घोष वादन की विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया। पुनौराधाम में आयोजित समापन कार्यक्रम ने प्रशिक्षण वर्ग को धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण से भी जोड़ा।

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