माता सीता जन्मभूमि के संत विद्वान प्रसिद्ध कथावाचक परम आदरणीय श्किशोरी शरण मधुकर संग बहिन जगत जननी सीता जी और प्रभु श्री राम पर आधारित सीता संवाद करने का अवसर मिला।लगभग तीन घंटे तक विचार विमर्श हुए।विचार गोष्ठी में मिथिला माहात्म्य ,जानकी कुमुदिनी,जानकी स्तुति जैसी कई ग्रंथ में उल्लेखित जानकी जी की महिमा का श्रवण किया।
महाराज जी ने सीतामढ़ी और कई जिला और राज्य में लगभग बयालीस वर्षों से कथावाचन का अनुभव प्राप्त किया है।जगत जननी बहिन सीता जी के प्रति और जगत पिता पाहुन श्री राम जी के प्रति अनन्य भक्ति रखते है।और अपने पूज्य गुरु सरकार के प्रति श्रद्धा भक्ति भाव विश्वास समर्पण निष्ठा निश्चल गुरुभक्ति दिव्य गुणों का दर्शन हुआ।
माता सीता जन्मभूमि पर आए कई संत विद्वान देश दुनिया के महंत इस पवित्र पावन भूमि को पूजते है।
यहां की रज को मस्तक पर धारण करते है।
परम भक्त चित्रलेखा जी,स्नेहलता जी, मोदलता जी, बक्सर वाले बाबा, अयोध्या धाम के कई संत बाबा नृत्य गोपाल दास जी,वेदांती जी महाराज राघवेंद्र सरकार का आगमन यहां हुआ।
श्री कोहबर कुंज में विराजमान बहिन सीता जी और पाहुन श्री राम को रोज रामचरित मानस गायन कर सुनाया जाता है।मंदिर में रामनाम जापक रहते है और करमाला से सीताराम नाम संकीर्तन और सुमिरन करते है।देश के सभी संतों की तस्वीर गुरु परम्परा के संतों की तस्वीर पीले वस्त्र से किनारे से सुशोभित है।हम अपने पूर्वजों का सम्मान कैसे करे यह सीखने के लिए एक बार दर्शन जरूर करना चाहिए।
गुरु महाराज की प्रतिमा सरकार की प्रतिमा श्री हनुमान जी की प्रतिमा महादेव का शिवलिंग पूजन नियमित विधि विधान से होता है।सनातन के ग्रंथों की सुंदर पुस्तकालय और नियमित रामायण की पंक्तियों का गायन सुखद एहसास अनुभूति कराता है।
मंद मंद स्वर में सीताराम नाम संकीर्तन की गूंज होती रहती है। बाग़ बगीचा के मध्य मंदिर की शोभा पर्यावरण संरक्षण एवं प्रकृति प्रेम शांति एकाग्रता प्रदान करता है।बहिन सीता की सखी माता लक्ष्मणा यहां उत्तरायणी है।तीन दिशा में प्रवाहित है।सुंदर घाट का निर्माण किया गया है।जो काफी मनोरम रमणीय है।नदी के दूसरे किनारे पर परम आदरणीय संत मूठिया बाबा का समाधि स्थल है।जहाँ की ज्योत से आज भी संत विद्वान अनुभूति लेते है।
एक शानदार गौशाला जिसमें देशी गाय की नियमित सेवा है।कई प्रकार की गाय को माता मानकर गौ पालन किया जाता है। गौ पालन में लगे संत सेवा भाव से गौ पालन कर रहे है।वही गौ माता को भी मीठी मीठी आवाज में सीताराम नाम संकीर्तन सुनने हेतु छोटे छोटे बॉक्स लगाए गए है।परम आदरणीया गौ माता का गौशाला स्वच्छ सुन्दर और शानदार है।
मिथिला की पावन संस्कृति संस्कार सांस्कृतिक विरासत विविधता में एकता और मिथिला की मधुर मिठास का केंद्र बिंदु है।संतों की सेवा, गौ माता की सेवा और मंदिर परिसर की स्वच्छता सुंदरता को समर्पित यह मुठिया बाबा आश्रम संत महापुरुषों की जप तप साधना स्थली है।
कई धार्मिक स्थल पर श्री सीताराम जी की कथा ,श्री मद्भागवत कथा श्री भक्तमाल चरित कथा करने का सौभाग्य महाराज जी को मिला है।
मंदिर पर नियमित आरती पूजा पद्धति श्री सीताराम
नाम संकीर्तन भजन संध्या तो होता ही है।साथ ही साथ गुरु पूर्णिमा जानकी नवमी राम नवमी हनुमान जयंती विवाह पंचमी पर कार्यक्रम आयोजित होते है।नौ दिवसीय सीताराम नाम जप महायज्ञ अष्टयाम रामर्चा पूजा रुद्राभिषेक गोपाष्टमी व्रत मनाए जाते है। संतों की सेवा सबसे ज्यादा प्रमुखता से की जाती है देश के कोने कोने से संत एवं पर्यटकों का आगमन होता है।जिनकी सेवा की जाती है।
सीता संवाद निदेशक आग्नेय कुमार ने कहा यहां आकर परम सौभाग्य प्राप्त हुआ जब इनकी सान्निध्यता में संत भूषण दास जी महाराज और कथावाचक दिनेश शर्मा जी समेत कई संतों के मध्य सीता संवाद आध्यात्मिक एवं साहित्यिक यात्रा पुस्तक प्रदान किया हूँ।
मिथिला दर्शन यात्रा पर विचार विमर्श हुए।माता सीता जन्मभूमि के पंच तीर्थ स्थल विकास संकल्पना पूर्ण होने तक धर्मजागरण जनजागरण अभियान अनवरत चलाने के संकल्प को दोहराया गया।
निश्चित ही श्री सीताराम नाम सुखधाम आश्रम मुरादपुर हरि छपरा डुमरा सीतामढ़ी एक आध्यात्मिक सुख शांति का अनमोल केंद्र है।जहां निर्मल पावन पवित्र श्री सीताराम नाम गुणगान महिमा का अनवरत संचार होता रहता है।
इसके उपरांत श्री हनुमान मंदिर स्टेशन रोड,दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर ,श्री रजत द्वार जानकी मंदिर, बड़ी कुटी ,छोटी कुटी, लाल कुटी ,हजारी नाथ मंदिर, राम विलास मंदिर,चक्र ऋषि आश्रम,राम जानकी मंदिर भवदेपुर में पुस्तक प्रदान किया गया।

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