सीतामढ़ी: जिले में उद्योगों की स्थापना और स्वरोजगार योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिलाधिकारी रिची पांडेय ने बैंकों को सक्रिय भूमिका निभाने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के पात्र लाभार्थियों को समय पर ऋण उपलब्ध कराना बैंकों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

समाहरणालय स्थित विमर्श सभा कक्ष में आयोजित उद्योग विभाग की समीक्षात्मक बैठक में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन (PMFME), प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना तथा अन्य स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।

छह बैंकों की अनुपस्थिति पर नाराजगी

बैठक में बंधन बैंक, एक्सिस बैंक लिमिटेड, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, आईसीआईसीआई बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और एचडीएफसी बैंक के प्रतिनिधियों के अनुपस्थित रहने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित बैंकों से स्पष्टीकरण प्राप्त करने का निर्देश दिया।

समय पर ऋण स्वीकृति पर दिया जोर

समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य जिले में अधिक से अधिक उद्योग स्थापित करना, स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना और स्थानीय उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि यदि बैंक समय पर ऋण स्वीकृत नहीं करेंगे तो योजनाओं का उद्देश्य प्रभावित होगा।

उन्होंने लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (LDM) को सभी बैंकों के साथ नियमित समन्वय बनाए रखने और प्रत्येक बैंक के प्रदर्शन की सतत निगरानी करने का निर्देश दिया। साथ ही कमजोर प्रदर्शन करने वाले बैंकों के साथ अलग से बैठक कर लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा।

PMFME योजना में 114 आवेदन अब भी लंबित

बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन (PMFME) योजना के तहत जिले का कुल भौतिक लक्ष्य 356 है। इसके मुकाबले 134 आवेदन विभिन्न बैंकों को भेजे गए हैं। इनमें अब तक 18 परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है, जबकि 23 लाभार्थियों को मार्जिन मनी का वितरण किया जा चुका है। हालांकि, अभी भी 114 आवेदन विभिन्न बैंकों में लंबित हैं।

इंडियन ओवरसीज बैंक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

योजना की समीक्षा में इंडियन ओवरसीज बैंक ने 66.67 प्रतिशत स्वीकृति दर के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। एचडीएफसी बैंक ने 33.33 प्रतिशत और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 10.87 प्रतिशत स्वीकृति दर दर्ज की।

वहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक का प्रदर्शन असंतोषजनक पाया गया। अग्रसारित आवेदनों के बावजूद इन बैंकों द्वारा एक भी परियोजना स्वीकृत नहीं किए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए लंबित मामलों का तत्काल निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

बैंक औद्योगिक विकास के अहम भागीदार

जिलाधिकारी ने कहा कि बैंक केवल वित्तीय संस्थान नहीं हैं, बल्कि जिले के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सभी बैंकों को पात्र आवेदनों का समयबद्ध निष्पादन करने और अनावश्यक विलंब से बचने का निर्देश दिया। साथ ही चेतावनी दी कि भविष्य की समीक्षा बैठकों में खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों की जवाबदेही तय की जाएगी।

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की भी हुई समीक्षा

बैठक में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत 4,918 आवेदन विभिन्न बैंकों को भेजे गए हैं। इनमें से 1,314 आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं, जबकि 1,141 लाभार्थियों को ऋण का वितरण किया गया है। जिलाधिकारी ने इस योजना के लंबित मामलों का भी शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में बैंकिंग उप समाहर्ता आशुतोष श्रीवास्तव, डीपीआरओ कमल सिंह, उद्योग महाप्रबंधक प्रिया भारती, एलडीएम अनिल कुमार सिंह सहित विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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