सरकार भले ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर निवेश कर रही हो और सरकारी अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के दावे किए जा रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत कई जगह इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आती है। सरकारी अस्पतालों में कुव्यवस्था और लापरवाही की तस्वीर अब भी बदलती दिखाई नहीं दे रही है।
गुरुवार देर रात जब एक मीडिया टीम ने सदर अस्पताल परिसर में स्थित मॉडल अस्पताल का जायजा लिया, तो वहां कई गंभीर कमियां सामने आईं। अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक दिखाई दी, जहां मरीजों और उनके परिजनों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा था।
प्रसव वार्ड के बाहर दर्दनाक दृश्य
सबसे चिंताजनक स्थिति प्रसव वार्ड के बाहर देखने को मिली। जानकारी के अनुसार नया टोला दरियापुर निवासी गर्भवती महिला माधुरी देवी प्रसव पीड़ा से जमीन पर तड़पती हुई नजर आईं। उनके पति लगातार उन्हें ढांढस बंधा रहे थे, लेकिन देर रात तक कोई चिकित्सक उनकी स्थिति देखने नहीं पहुंचा।
माधुरी देवी ने बताया कि वह सुबह करीब छह बजे ही अस्पताल पहुंच गई थीं, लेकिन उन्हें तत्काल भर्ती नहीं किया गया। करीब 12 घंटे तक इंतजार करने के बाद ही उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया।
अस्पताल के रोस्टर के अनुसार उस समय ड्यूटी पर डॉ. अलका की तैनाती थी, लेकिन देर रात तक उनके अस्पताल में मौजूद न होने की बात सामने आई। इससे परिजनों में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया।
हंगामे के बाद हुई कार्रवाई
परिजनों के विरोध और हंगामे की सूचना प्रशासन तक पहुंची, जिसके बाद मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में आया। प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद स्थिति संभाली गई।
बताया जा रहा है कि रात करीब 1 बजकर 20 मिनट पर डॉ. निधि ने ऑपरेशन कर सुरक्षित प्रसव कराया। ऑपरेशन के बाद माधुरी देवी ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।
हालांकि इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि यदि समय पर चिकित्सा सुविधा मिल जाती, तो उन्हें इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
यह मामला उस समय सामने आया है, जब सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार संसाधन बढ़ाने की बात कर रही है। इसके बावजूद अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति, लापरवाही और प्रबंधन की कमजोर व्यवस्था जैसी समस्याएं अक्सर सामने आती रहती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पतालों में नियमित निगरानी और जिम्मेदारी तय किए बिना स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है।
