सिंगरौली जिले की खदान परियोजनाओं में लगातार हो रही दुर्घटनाओं और सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच “सच बेधड़क” द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित खबरों का असर दिखाई देने लगा है। कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) प्रबंधन ने मामलों को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच और निरीक्षण का निर्णय लिया है।

डोजर चालक की संदिग्ध मौत पर उठे सवाल

2 मार्च 2026 को बघेल कंपनी में कार्यरत डोजर चालक की ड्यूटी के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। घटना के बाद कंपनी प्रबंधन और मृतक के परिजनों के बीच सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए। समझौते के तहत आश्रित पुत्र प्रिंस कुमार सेन को ₹25 लाख मुआवजा, ₹50 हजार अंतिम संस्कार सहायता, ईपीएफ की जमा राशि और अन्य देय भुगतान देने पर सहमति बनी। साथ ही स्किल्ड कैटेगरी में नौकरी देने का आश्वासन भी दिया गया।

हालांकि मुआवजा मानवीय पहल मानी जा सकती है, लेकिन सुरक्षा में संभावित लापरवाही की जिम्मेदारी तय होने को लेकर अब भी सवाल कायम हैं।

अमलोरी गेट नंबर 3 पर विवाद

इसी बीच अमलोरी प्रोजेक्ट के गेट नंबर 3 पर कलिंगा कंपनी का एक ड्राइवर और CISF जवानों के बीच हुए विवाद ने सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया।

आरोप है कि ड्यूटी पर जा रहे ड्राइवर के साथ मारपीट हुई, जिसके बाद घंटों तक गेट पर तनाव की स्थिति बनी रही। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार माहौल गरम था, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया। अमलोरी कलिंगा का ये भी मामला जांच के दायरे में है

जब प्रवेश द्वार पर ही सुरक्षा व्यवस्था विवादों में हो, तो अंदर काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक है।
निगाही परियोजना में बड़ा हादसा

3 मार्च को NCL निगाही परियोजना में PC पटेल कंपनी के ग्रेडर ऑपरेटर राज नारायण कुशवाहा (निवासी कचनी) गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गए।

जानकारी के अनुसार ग्रेडर मशीन एक बेंच से दूसरे बेंच में जाते समय अनियंत्रित होकर हाइवाल से नीचे उतर गई। घायल ऑपरेटर को पहले NCL नेहरू अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर वाराणसी रेफर किया गया।
इस घटना ने भी परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

5 मार्च 2026 से उच्च स्तरीय निरीक्षण

इन घटनाओं के मद्देनज़र CIL चेयरमैन, DDG (Deputy Director General), कोल सुरक्षा विभाग के अधिकारी और यूनियन प्रतिनिधि 5 मार्च 2026 से कृष्णशिला, अमलोरी और निगाही खदानों का 7 दिवसीय निरीक्षण करेंगे।

सूत्रों के अनुसार निरीक्षण के दौरान हालिया दुर्घटनाओं के कारणों, सुरक्षा मानकों, मशीनों की स्थिति, शिफ्ट संचालन और गेट सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाएगी।
स्थानीय श्रमिक संगठनों और क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि निरीक्षण केवल औपचारिकता न बनकर वास्तविक सुधार की दिशा में ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करे।

अब देखना होगा कि इस उच्च स्तरीय विजिट के बाद खदानों की सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव होते हैं और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाती है।

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