सिंगरौली: गौ तस्करी के मामले में पत्रकार सऊद पठान के खिलाफ दर्ज मुकदमे को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि सरई पुलिस ने जल्दबाजी में कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया है, जबकि उस समय सऊद पठान जिले में मौजूद ही नहीं थे।

बताया जा रहा है कि 2 मार्च को सरई रेलवे स्टेशन से धनबाद–भोपाल एक्सप्रेस से पत्रकार ज्ञानेन्द्र प्रजापति, धीरेन्द्र द्विवेदी, सत्य प्रकाश प्रजापति और सतेन्द्र प्रजापति भोपाल के लिए रवाना हुए थे। उसी ट्रेन के स्लीपर कोच में पत्रकार सऊद पठान अपनी पत्नी के साथ यात्रा करते हुए मिले। सहयात्रियों के अनुसार उस समय सऊद पठान की तबीयत काफी खराब थी और उन्हें चलने-फिरने तथा बाथरूम तक जाने में भी पत्नी का सहारा लेना पड़ रहा था।

ट्रेन 3 मार्च की सुबह करीब 9:30 बजे भोपाल स्टेशन पहुंची, जिसके बाद सभी यात्री अपने-अपने काम से निकल गए। सऊद पठान के अनुसार उन्होंने भोपाल में अस्पताल जाकर स्वास्थ्य जांच कराई और दवा ली। इसके बाद वे 3 मार्च को ही भोपाल–धनबाद एक्सप्रेस से वापस अपने घर के लिए रवाना हो गए। वापसी यात्रा के दौरान भी उसी ट्रेन में पत्रकार धीरेन्द्र द्विवेदी से उनकी मुलाकात हुई। ट्रेन 4 मार्च की सुबह लगभग 7:50 बजे सरई रेलवे स्टेशन पहुंची, जहां दोनों उतर गए।

इधर जिस गौ तस्करी मामले में सऊद पठान का नाम सामने आया है, वह घटना देर रात लगभग 2–3 बजे की बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब उस समय सऊद पठान ट्रेन से सफर कर रहे थे और उनकी तबीयत भी खराब थी, तो उनका नाम इस मामले में कैसे जोड़ा गया।

सऊद पठान का कहना है कि उनके पास यात्रा से जुड़े सभी प्रमाण मौजूद हैं और सहयात्री पत्रकार ज्ञानेन्द्र प्रजापति तथा धीरेन्द्र द्विवेदी सहित अन्य लोग इसके साक्षी हैं। इस पूरे मामले को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं और मांग की जा रही है कि पुलिस स्पष्ट करे कि किन साक्ष्यों के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया।

पत्रकारों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि कानून व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बना रहे और किसी निर्दोष व्यक्ति पर गलत तरीके से मुकदमा दर्ज न हो।

समता स्वर न्यूज

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version