केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच केंद्र शासित प्रदेश की संवैधानिक सुरक्षा और शासन व्यवस्था को लेकर चल रही बातचीत अब अगले चरण में पहुंच गई है। गृह मंत्रालय ने लद्दाख के प्रमुख संगठनों लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के साथ सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से सात प्रमुख मुद्दों पर ड्राफ्ट प्रस्ताव तैयार कर जमा करने को कहा है।

बताया जा रहा है कि लद्दाख के प्रतिनिधियों की ओर से दिए जाने वाले प्रस्ताव के आधार पर अक्टूबर में प्रस्तावित अगले दौर की बैठक का एजेंडा और आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

हाल में हुई बैठक के दौरान गृह मंत्रालय ने लद्दाख के लिए तीन-स्तरीय प्रशासनिक व्यवस्था का एक प्रारूप भी सामने रखा। इसके तहत केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर एक सर्वोच्च संस्था, स्वायत्त जिला परिषदों और पंचायतों को शामिल करने का प्रस्ताव है।

सात प्रमुख मुद्दों पर मांगी गई राय

1. UT स्तर की संस्था का ढांचा:
गृह मंत्रालय ने प्रस्तावित सर्वोच्च संस्था और उसकी कार्यकारी इकाई के नाम एवं संरचना को लेकर लद्दाख के प्रतिनिधियों से सुझाव मांगे हैं।

2. चुनाव की प्रक्रिया:
UT स्तर की संस्था के सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया को लेकर भी राय मांगी गई है। लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि इस संस्था के लिए प्रत्यक्ष चुनाव कराया जाना चाहिए।

3. अधिकारों का बंटवारा:
प्रस्तावित UT स्तर के निकाय और स्वायत्त जिला परिषदों के बीच अधिकारों और जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर स्पष्ट व्यवस्था तैयार करने पर चर्चा हुई। इसका उद्देश्य पूरे क्षेत्र में समन्वित विकास और प्रभावी प्रशासन सुनिश्चित करना है।

4. कानून बनाने का अधिकार:
यह भी विचार किया जा रहा है कि प्रस्तावित निर्वाचित UT स्तर की संस्था को किन-किन विषयों पर कानून बनाने का अधिकार दिया जाना चाहिए।

बैठक में अन्य संबंधित मुद्दों पर भी लद्दाख के प्रतिनिधियों से प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है, ताकि अक्टूबर में होने वाली अगली बैठक में इन पर विस्तार से चर्चा की जा सके।

पुराने मामलों को वापस लेने और मुआवजे का आश्वासन

बैठक के बाद प्रशासन की ओर से बताया गया कि लद्दाख के प्रतिनिधियों को संवैधानिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर आवश्यक स्पष्टीकरण दिया गया है। इसके अलावा 24 सितंबर 2025 की हिंसक घटनाओं से जुड़े मामलों को वापस लेने और प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की मांग को लद्दाख के उपराज्यपाल के समक्ष रखने का आश्वासन भी दिया गया है।

हालांकि, बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने प्रस्तावित UT स्तर की संस्था के गठन और उसके अधिकारों को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है। उनका कहना है कि जब तक प्रस्तावित संस्था पूरी तरह अस्तित्व में नहीं आ जाती, तब तक उसके अधिकारों से संबंधित कोई बड़ा फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया जाना चाहिए।

केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच अगले दौर की बातचीत अक्टूबर में प्रस्तावित है। ऐसे में सात प्रमुख मुद्दों पर तैयार होने वाला ड्राफ्ट आगे की वार्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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