लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश): पुलिस कस्टडी में युवक की मौत का मामला अब राजनीतिक गलियारों में गर्मा गया है। लखीमपुर खीरी के मझगई थाना क्षेत्र के हुलासी पुरवा गांव में हुई इस घटना के बाद से आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है। स्वामी प्रसाद मौर्य, जो पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं, ने इस घटना को लेकर भाजपा सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला किया। स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जंगलराज जैसा माहौल बन गया है, जहां कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और आए दिन लोगों की हत्याएं हो रही हैं।
घटना का विवरण
यह मामला लखीमपुर खीरी के हुलासी पुरवा गांव का है, जहां रामचंद्र मौर्य नामक युवक की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई। रामचंद्र मौर्य को पुलिस ने शराब निर्माण के आरोप में गिरफ्तार किया था, लेकिन पुलिस ने दावा किया कि गिरफ्तारी के दौरान कोई अवैध सामग्री बरामद नहीं हुई। इसके बाद रामचंद्र की मौत हो गई, और इस मामले में कई सवाल उठने लगे।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने शनिवार को मृतक के परिवार से मुलाकात की और घटना की जानकारी ली। उन्होंने मृतक के बेटे के इलाज के लिए डॉक्टर से फोन पर भी बात की। मौर्य ने इस घटना को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि यह उत्तर प्रदेश में बढ़ते जंगलराज का परिणाम है।
स्वामी प्रसाद मौर्य का बयान
स्वामी प्रसाद मौर्य ने मीडिया से बातचीत में कहा, “उत्तर प्रदेश में अब जंगलराज जैसा माहौल बन गया है। पुलिस द्वारा निर्दोष लोगों की हत्या की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तो कुंभ के न्योते बांटते घूम रहे हैं, लेकिन प्रदेश में अपराधों की संख्या बढ़ती जा रही है। मौर्य समाज के लोग शराब से दूर रहते हैं, लेकिन रामचंद्र मौर्य को शराब निर्माण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जबकि कोई भी अवैध सामग्री बरामद नहीं हुई। यह पूरी तरह से एक साजिश का हिस्सा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने मृतक के पोस्टमार्टम रिपोर्ट को अपने हिसाब से तैयार किया है और इसमें गंभीर खामियां हैं। “इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके,” मौर्य ने कहा।
पुलिस पर गंभीर आरोप
स्वामी प्रसाद मौर्य ने पुलिस प्रशासन पर भी कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मृतक के परिवार को धमकाया और पूरे मामले को दबाने की कोशिश की। “सीओ पीपी सिंह ठाकुर साही ने परिवार को धमकाया और इंस्पेक्टर दया शंकर द्विवेदी ने पूरी तरह से गुंडागर्दी की है,” मौर्य ने आरोप लगाया।
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने एक परिवार को टार्गेट कर लिया है और उनके खिलाफ रंजिश पाल ली है। “पांच भाइयों में से एक भाई दिनेश बचा है, पुलिस उसे भी जान से मारने की धमकी दे रही है। परिवार ने पहले ही कोर्ट में अर्जी दी थी और पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन अब पुलिस इसे अपनी रंजिश मान रही है और पूरे परिवार को खत्म करना चाहती है,” मौर्य ने कहा।
मुख्यमंत्री योगी से मांग
स्वामी प्रसाद मौर्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए और मृतक के परिवार को कम से कम 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
“इस घटना को लेकर हम सरकार से यह मांग करते हैं कि उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों को सख्त सजा दी जाए। मृतक के परिवार को मुआवजा मिलना चाहिए ताकि उन्हें न्याय मिल सके,” मौर्य ने कहा।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान के बाद से इस मामले में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है और इस घटना को लेकर उनकी निंदा की है। समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पार्टी ने भी इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
सपा के नेता ने कहा, “यह सरकार कानून और व्यवस्था को बनाए रखने में पूरी तरह से विफल हो गई है। पुलिस कस्टडी में हुई मौतें आम हो गई हैं और सरकार इसके खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।”
वहीं, कांग्रेस ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की और कहा कि पुलिस को किसी भी हालत में निर्दोष लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए।
पुलिस का पक्ष
पुलिस ने अपनी सफाई में कहा कि रामचंद्र मौर्य को शराब निर्माण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और उसकी मौत की जांच की जा रही है। पुलिस ने यह भी कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कोई संदिग्ध स्थिति नहीं पाई गई है और इस मामले की पूरी जांच की जा रही है।
निष्कर्ष
लखीमपुर खीरी में पुलिस कस्टडी में हुई रामचंद्र मौर्य की मौत ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं और इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। अब देखना यह है कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या मृतक के परिवार को न्याय मिलता है।