लखीमपुर खीरी जिले के निघासन तहसील स्थित खैरहनी गांव के पंचायत भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा मकर संक्रांति उत्सव को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में संघ के प्रमुख कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों और ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यह आयोजन न केवल मकर संक्रांति पर्व की सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित करता है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव और राष्ट्रीय एकता की दिशा में संघ के प्रयासों को भी प्रदर्शित करता है।
कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस दौरान मुख्य अतिथि खंड प्रचारक श्री आदर्श जी ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उन्होंने अपने बौद्धिक उद्बोधन में मकर संक्रांति के महत्व पर प्रकाश डाला और इसे भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बताया।
श्री आदर्श जी ने कहा, “मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं है, यह हमारे समाज को एक नई दिशा देने का अवसर भी है। इस दिन हम सूर्य की उत्तरायण यात्रा का स्वागत करते हैं, जो जीवन में प्रकाश, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है।” उन्होंने संघ के कार्यों को समाज के उत्थान में महत्वपूर्ण बताते हुए सभी उपस्थित लोगों को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया।
गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस विशेष अवसर पर सह खंडकरवाह हनुमत जी, जिला शारीरिक शिक्षण प्रमुख रामनिवास जी, और नितिन मंडल कार्यवाह जैसे संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनके अलावा शाखा कार्यवाह और खैरहनी गांव के अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उपस्थित लोगों में जगदीश प्रसाद, के.के लोधी, मोमराज, अवधेश, उत्तम, देवेंद्र, आकाश, शुभम, प्रिंस, आशीष, रामकुमार, ओमप्रकाश, सत्यम, शिवपूजन, ब्रजमोहन, बलराम, अमित, सुशील और अन्य कई स्वयंसेवक शामिल थे।
युवाओं की भागीदारी
इस कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली। युवा स्वयंसेवकों ने उत्साह और जोश के साथ कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में सहयोग दिया। खंड प्रचारक श्री आदर्श जी ने युवाओं को संघ के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया और उन्हें समाज सेवा के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा, “युवा समाज की शक्ति हैं। यदि युवा सही दिशा में कार्य करें, तो समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।”
संघ का संदेश: राष्ट्रीय एकता और समाज सेवा

कार्यक्रम के दौरान संघ के कार्यकर्ताओं ने मकर संक्रांति पर्व को समाज सेवा और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में मनाने का संदेश दिया। खंड प्रचारक श्री आदर्श जी ने कहा कि मकर संक्रांति का पर्व हमें अपने व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर समाज के कल्याण के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने संघ के विभिन्न सामाजिक कार्यों और उनके प्रभावों के बारे में बताया।
पारंपरिक रीति-रिवाज और तिल-गुड़ का वितरण
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने तिल-गुड़ बांटकर मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं। तिल-गुड़ का यह वितरण भारतीय संस्कृति में आपसी प्रेम और एकता का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान सभी ने एक-दूसरे को पर्व की बधाई दी और समाज में आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
संघ की सामाजिक भूमिका
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। संघ के कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों को संघ की विभिन्न योजनाओं और अभियानों के बारे में जानकारी दी और उन्हें इन अभियानों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत
इस कार्यक्रम में युवाओं को संघ की विचारधारा और उसके उद्देश्यों से अवगत कराया गया। युवाओं ने इस आयोजन से प्रेरणा लेकर समाज में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प लिया। संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने युवाओं को यह समझाया कि उनका योगदान समाज और राष्ट्र के निर्माण में कितना महत्वपूर्ण है।
समाज में सकारात्मक बदलाव का संकल्प
मकर संक्रांति उत्सव के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर खंड प्रचारक श्री आदर्श जी ने कहा, “हम सभी को अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय रहकर समाज के विकास के लिए प्रयास करना चाहिए। संघ का उद्देश्य समाज में एकता, समर्पण और सेवा की भावना को बढ़ावा देना है।”
उत्सव का समापन
कार्यक्रम का समापन सभी उपस्थित लोगों के सामूहिक राष्ट्रगान और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर सभी ने मकर संक्रांति के पर्व को यादगार बनाने के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त किया।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित यह मकर संक्रांति उत्सव न केवल एक सांस्कृतिक आयोजन था, बल्कि समाज में एकता और सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास भी था। इस कार्यक्रम ने खैरहनी गांव के लोगों को एक मंच पर लाकर उन्हें समाज सेवा और राष्ट्रीय एकता के महत्व को समझाया।
इस प्रकार, मकर संक्रांति का यह आयोजन संघ की सामाजिक सक्रियता और समर्पण को दर्शाता है। ऐसे आयोजन न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखते हैं, बल्कि समाज में एकजुटता और भाईचारे को भी बढ़ावा देते हैं।