ये फोर्ब्स की 30 अंडर 30 लिस्ट वाले ध्रुव दत्त शर्मा हैं। गुरुग्राम के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट 32 एवेन्यू के MD. इन्होंने एक ही प्रॉपर्टी कई लोगों को बेच दी। किसी को बाय बैक किसी को 30 साल की लीज गारंटी के वादे किए। 2025 तक रेंट भी दिया। फिर पैसा खत्म हो गया तो रेंट देना बंद हो गया। कई FIR हुई तो 500 करोड़ का घोटाला निकला। अभी और आंकड़ा सामने आयेगा। मेरे अनुमान से घोटाला कम से कम 2000 करोड़ का बैठना चाहिए।

मैने अपने 6- 7 साल रियल एस्टेट को दिए, NCR के लगभग सभी रियल एस्टेट किंग्स के साथ उठा बैठा , साथ खाया और पिया। मुझे समझ आया एक दो को छोड़ बाकी सारे एक नंबर के चोर हैं। ब्रोकिंग कंपनी के मालिक खुद अपने एंप्लॉई को ठगना सिखाते हैं। कुछ कंपनी के एंप्लॉई को तो पता भी नहीं होता कि वो को स्कीम या प्रोडक्ट बेच रहे वो फर्जी है, कभी मिलेगा ही नहीं। समझदार आदमी जल्दी किनारा कर लेता है।

सबसे बड़ी कंपनी इन्वेस्टर क्लिनिक के मालिक ने इसी तरह की स्कीम बेच के, नोएडा एक्सटेंशन में गौर चौक के पास ब्रोकिंग से अपना माल बनाने की जमीन ले ली। फिर वही खेल की एक दुकान चार बार चार लोगों को बेच दी। 2006 से माल बन रहा आज तक नहीं बना। कितने ही लोगों को ठगा जा चुका है

इस फील्ड में प्रोफेशनल लोगों की कमी है। और इसका श्रेय सरकारों को जाता है। देश का सबसे ज्यादा पैसा जिस फील्ड में जाता है उसे रेग्यूलेट नहीं किया है, उसका कोई मंत्रालय नहीं है। उसके सर्कुलर नहीं आते। क्लियर रूल्स नहीं है। तो ग्रे एरिया बहुत है। वहां ये चोर उचक्के घुस के ठग रहे हैं।

पूरे देश की कुल इन्वेस्टमेंट का सबसे ज्यादा हिस्सा प्रॉपर्टी में लगता है। और इस फील्ड में MBA छोड़ो एक कोर्स तक नहीं है। एक RERA नाम की ऑथोरिटी बनाई भी लेकिन उसके ऑर्डर पर गिरफ्तारी हो नहीं सकती। उसके कोर्ट में आप मुकदमा जीत भी जाओ और बिल्डर मना कर दे पेमेंट वापस करने से क्या करोगे ? फायदा क्या हुआ इस ऑथोरिटी बनाने का ?

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