मधुबनी में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत अधिप्राप्त धान के विरुद्ध कस्टम मिल्ड राइस (CMR) आपूर्ति की समीक्षा के दौरान लक्ष्य के अनुरूप प्रगति नहीं मिलने पर जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और मिल संचालकों को समयबद्ध तरीके से लंबित आपूर्ति पूरी करने के निर्देश दिए।

समाहरणालय स्थित सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने प्रखंडवार और मिलवार सीएमआर आपूर्ति की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में जिला प्रबंधक, बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम अजितेन्द्र किशोर, जिला सहकारिता पदाधिकारी सुदर्शन कुमार, जिले के सभी मिल संचालक तथा सभी प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारी उपस्थित रहे।

अब तक केवल 81 प्रतिशत CMR आपूर्ति

समीक्षा के दौरान सामने आया कि जिले में अब तक केवल 81 प्रतिशत CMR की आपूर्ति हो सकी है, जो निर्धारित लक्ष्य की तुलना में संतोषजनक नहीं है। इस पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित पदाधिकारियों और मिल संचालकों को कड़ी चेतावनी दी।

उन्होंने कहा कि अधिप्राप्त धान के विरुद्ध शत-प्रतिशत CMR आपूर्ति सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

लंबित मामलों पर मांगा स्पष्टीकरण

बैठक के दौरान उन पैक्सों और राइस मिलों की पहचान की गई, जहां सबसे अधिक CMR आपूर्ति लंबित है। जिलाधिकारी ने संबंधित पैक्स अध्यक्षों, पैक्स प्रबंधकों, प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों और मिल संचालकों को स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि सभी संबंधित अधिकारी और संस्थाएं अपनी जवाबदेही तय करें तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर लंबित CMR की आपूर्ति पूरी करें।

नियमित होगी प्रगति की समीक्षा

जिलाधिकारी ने जिला सहकारिता पदाधिकारी और जिला प्रबंधक को नियमित रूप से प्रगति की निगरानी करने तथा लंबित मामलों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लक्ष्य की प्राप्ति तक समीक्षा बैठकें लगातार आयोजित की जाएंगी और कार्य में उदासीनता बरतने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी मिल संचालकों और सहकारिता विभाग के अधिकारियों से आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए शत-प्रतिशत CMR आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य को समय पर पूरा करना सभी संबंधित पक्षों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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