बरसात के मौसम के साथ डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए मधुबनी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। 10 जुलाई 2026 को नगर निगम के नगर आयुक्त उमेश कुमार भारती की अध्यक्षता में जिला समन्वय समिति (DCC) की बैठक आयोजित की गई, जिसमें डेंगू की रोकथाम, लार्वा नियंत्रण, फॉगिंग, जांच व्यवस्था और जन-जागरूकता अभियान की व्यापक समीक्षा की गई।

बैठक में नगर आयुक्त उमेश कुमार भारती ने कहा कि डेंगू की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय मच्छरों के लार्वा को नष्ट करना है। उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि लोगों को अधिक से अधिक जागरूक किया जाए। इसके लिए माइकिंग, सूचना-शिक्षा-संचार (IEC) सामग्री का वितरण तथा सामुदायिक स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए।

शहर और गांव में अलग-अलग जिम्मेदारी

बैठक में वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में एंटी-लार्वा छिड़काव और फॉगिंग की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की होगी, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह जिम्मेदारी नगर निगम निभाएगा।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक जिले में डेंगू के केवल 2 मामले सामने आए हैं। वहीं 2025 में 81 और 2024 में 138 डेंगू मरीज दर्ज किए गए थे। उन्होंने कहा कि नगर निगम क्षेत्र से बाहर स्वास्थ्य विभाग नियमित रूप से एंटी-लार्वा छिड़काव कर रहा है और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

ELISA टेस्ट से ही होगी पुष्टि

अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (ACMO) डॉ. एस.एन. झा ने बताया कि निजी अस्पतालों और प्रयोगशालाओं में NS1 Rapid Kit से की गई जांच को अंतिम पुष्टि नहीं माना जाता। ऐसे मामलों को केवल संदिग्ध श्रेणी में रखा जाता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि डेंगू की अंतिम पुष्टि केवल ELISA टेस्ट के माध्यम से ही की जाती है। किसी मरीज में संक्रमण की पुष्टि होने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम उसके घर का भौतिक सत्यापन करती है और घर के 500 मीटर के दायरे में एंटी-लार्वा छिड़काव कराया जाता है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (ICDS), जिला परियोजना प्रबंधक (जीविका), CFAR के जिला समन्वयक, जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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