मधुबनी। महिलाओं और बालिकाओं के अधिकारों, सुरक्षा एवं सशक्तिकरण को लेकर राजनगर प्रखंड की ग्राम पंचायत रघुनीदेहट स्थित पंचायत भवन में पंचायत स्तरीय जेंडर फोरम की मासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य पंचायत स्तर पर जेंडर आधारित समस्याओं की पहचान, उनके समाधान और महिलाओं एवं बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करना रहा।
बैठक में पंचायत प्रतिनिधियों, पंचायत कर्मियों, जीविका तथा संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ जिला हब फॉर एंपावरमेंट ऑफ वूमेन (DHEW), मधुबनी की टीम ने भाग लिया। इस दौरान बाल विवाह, घरेलू हिंसा, बालिका शिक्षा, महिला सुरक्षा, लैंगिक भेदभाव और जेंडर समानता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका अहम
बैठक को संबोधित करते हुए जिला मिशन समन्वयक, DHEW मधुबनी अंजनी कुमार झा ने कहा कि पंचायत स्तरीय जेंडर फोरम महिलाओं और बालिकाओं से जुड़ी समस्याओं को स्थानीय स्तर पर पहचानने और उनके समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण मंच है।
उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि समाज के सबसे करीब रहने वाले जनप्रतिनिधि हैं। ऐसे में महिलाओं और बालिकाओं की समस्याओं को समझने, उन्हें उनके अधिकारों तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और जरूरतमंद लोगों को सहायता सेवाओं से जोड़ने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से बाल विवाह, घरेलू हिंसा, लैंगिक भेदभाव और महिलाओं के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा की रोकथाम के लिए पंचायत स्तर पर लगातार जागरूकता अभियान और सामूहिक प्रयास करने की अपील की।
जेंडर आधारित हिंसा और महिला अधिकारों पर दी जानकारी
बैठक के दौरान DHEW मधुबनी के लैंगिक विशेषज्ञ शिवराम मेहरा ने जेंडर समानता और जेंडर आधारित हिंसा के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी। उन्होंने बाल विवाह की रोकथाम, बालिका शिक्षा, घरेलू हिंसा, महिला अधिकार, महिला सुरक्षा, लैंगिक भेदभाव और जेंडर आधारित हिंसा जैसे विषयों पर चर्चा की।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को उनकी जिम्मेदारियों से अवगत कराते हुए कहा कि महिलाओं और बालिकाओं से जुड़ी किसी भी समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। पीड़ित महिला या बालिका को समय पर उचित सहायता उपलब्ध कराने के साथ संबंधित सेवा या विभाग से जोड़ना जरूरी है।
महिलाओं और बच्चों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर बताए
बैठक में महिलाओं, बालिकाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी गई। उपस्थित लोगों को बताया गया कि हिंसा, उत्पीड़न या किसी अन्य प्रकार की सहायता की आवश्यकता होने पर संबंधित हेल्पलाइन से संपर्क किया जा सकता है।
- 181 — महिला हेल्पलाइन
- 1091 — महिला पुलिस हेल्पलाइन
- 1098 — चाइल्ड हेल्पलाइन
- 112 — आपातकालीन सहायता सेवा
- 1930 — साइबर अपराध हेल्पलाइन
पंचायत प्रतिनिधियों से इन हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी गांव-गांव और समुदाय स्तर तक पहुंचाने की अपील की गई, ताकि जरूरत पड़ने पर महिलाएं, बालिकाएं और बच्चे तत्काल सहायता प्राप्त कर सकें।
बाल विवाह रोकने और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर
बैठक में बाल विवाह की रोकथाम को लेकर विशेष रूप से चर्चा की गई। सदस्यों से कहा गया कि क्षेत्र में बाल विवाह की संभावित घटना की जानकारी मिलने पर समय रहते संबंधित विभाग या पदाधिकारी को सूचित किया जाए। साथ ही, समुदाय के बीच बाल विवाह के दुष्परिणामों को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ होने वाली अन्य प्रकार की हिंसा की पहचान एवं रोकथाम के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। महिलाओं को उनके अधिकारों, सहायता सेवाओं और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने तथा पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
बैठक में बालिका शिक्षा को महिला सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए प्रत्येक बालिका को शिक्षा का समान अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। पंचायत स्तर पर बालिकाओं की शिक्षा में आने वाली बाधाओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की गई।
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