बिहार की एनडीए सरकार ने पूर्णिया के लोकप्रिय जन जन के लोकप्रियनेता पप्पू यादव जी को रात के अंधेरे में गिरफ्तार करके यह साबित कर दिया है कि वह जनता की आवाज (बिहार की आवाज ) से कितनी बुरी तरह डरी हुई है। यह गिरफ्तारी कानून का पालन नहीं, बल्कि डर, दमन और बदले की राजनीति का खुला ऐलान है! 2
सत्ता का अहंकार और संवेदनहीनता,
आधी रात की कायराना हरकत,जो सरकार जनता के सवालों का जवाब नहीं दे पाती, वही आधी रात को जननेताओं को घर से उठाने का कायरतापूर्ण काम करती है। क्या यही है आपका ‘सुशासन’?
पप्पू यादव जी की खराब सेहत के बावजूद उनके साथ इस तरह का व्यवहार सत्ता की मानसिक दिवालियापन और संवेदनहीनता को उजागर करती है।
जनता की आवाज को दबाने की कोशिश: पूर्णिया की जनता ने जिसे अपना प्यार और विश्वास दिया, उसे सलाखों के पीछे डालकर आप जनता के जनादेश का अपमान कर रहे हैं।
“जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है।”
यह कानून का राज नहीं, बल्कि तानाशाही की पराकाष्ठा है। सत्ता के मद में चूर लोग यह भूल गए हैं कि जेल की दीवारें जननेताओं के हौसलों को नहीं रोक सकतीं। बिहार की जागरूक जनता इस अन्याय को देख भी रही है और समझ भी रही है..
इस दमनकारी नीति का जवाब जनता समय आने पर देगी। संघर्ष की यह मशाल अब बुझेगी नहीं, बल्कि और तेज़ होगी! ✊
