कठिन परिस्थितियों में भी नहीं खोया धैर्य, जनसंवाद और संवेदनशीलता से डीएम ने कायम की प्रशासनिक दक्षता की मिसाल,

कार्यशैली की चहुंओर सराहना, जिले के विभिन्न क्षेत्र एवं वर्ग के व्यक्तियों ने डीएम से भेंट कर उनकी कार्य प्रणाली एवं पीपुल फ्रेंडली व्यवहार की की तारीफ
मधुबनी।
4 नवंबर, 2026

जिले के बाबूबरही प्रखंड अंतर्गत बलिराजगढ़ में घटित संवेदनशील घटना के दौरान जिला पदाधिकारी श्री आनंद शर्मा द्वारा जिस धैर्य, संयम, संवेदनशीलता एवं कुशल प्रशासनिक क्षमता एवं दक्षता का परिचय दिया गया, वह जिले के प्रशासनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अनुकरणीय उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पूरी सूझबूझ के साथ स्थिति को संभालने, आम लोगों की भावनाओं एवं चिंताओं को समझने तथा शांति एवं सद्भाव बनाए रखने की उनकी कार्यशैली की जिले के विभिन्न वर्गों के व्यक्तियों ने सराहना की है।

इसी क्रम में बुधवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों एवं वर्गों से जुड़े प्रतिनिधियों के एक समूह ने जिला पदाधिकारी श्री आनंद शर्मा से समाहरणालय मे शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधियों ने बलिराजगढ़ की संवेदनशील घटना को जिस परिपक्वता, धैर्य एवं प्रशासनिक दक्षता के साथ उन्होंने संभाला, उसके लिए उनकी भूरी-भूरी प्रशंसा की। प्रतिनिधियों ने जिला पदाधिकारी को पुष्पगुच्छ भेंटकर सम्मानित किया तथा उनकी कार्यप्रणाली कार्यदक्षता एवं कार्यक्षमता को अनुपम, अद्भभूत एवं आदर्श बताते हुए उन्हें न केवल मधुबनी के लिए बल्कि अन्य जिलों के लिए भी अनुकरणीय बताया।

प्रतिनिधियों ने कहा कि किसी भी संवेदनशील परिस्थिति में प्रशासनिक नेतृत्व की वास्तविक परीक्षा होती है। ऐसी स्थिति में जिला पदाधिकारी ने अपने कुशल नेतृत्व, प्रशासनिक अनुभव एवं व्यवहार-कौशल का परिचय देते हुए न केवल भीड़ प्रबंधन को प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया, बल्कि धरनारत व्यक्तियों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी भावनाओं, समस्याओं एवं चिंताओं को गंभीरता से सुना और समझा। उन्होंने धैर्यपूर्वक सभी पक्षों की बातें सुनीं तथा हरसंभव सहयोग एवं सहायता का भरोसा दिया।

उन्होंने कहा कि जिला पदाधिकारी की विशेषता यह रही कि उन्होंने पूरी परिस्थिति में संवाद, संवेदनशीलता एवं संयम को प्राथमिकता दी। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी को भी पीपुल फ्रेंडली दृष्टिकोण के साथ कार्य करने का निर्देश देते हुए स्थिति को नियंत्रित एवं व्यवस्थित बनाए रखा। इससे प्रशासन और आम लोगों के बीच संवाद,विश्वास एवं भरोसा का वातावरण कायम रखने में मदद मिली।

प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि जिला पदाधिकारी ने घटना से प्रभावित पीड़ित परिवार एवं उनके परिजनों से पूरी सहानुभूति एवं संवेदना के साथ मुलाकात की। उनकी पीड़ा को समझते हुए हर स्तर पर प्रशासनिक सहयोग एवं सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। संवेदनशील घटना के दौरान पीड़ित परिवार के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाना तथा आम लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनके प्रशासनिक कौशल एवं मानवीय संवेदनशीलता को दर्शाता है।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि जिला पदाधिकारी की कार्यक्षमता, निर्णय लेने की क्षमता, संवाद कौशल एवं प्रशासनिक कार्यप्रणाली अत्यंत प्रभावशाली एवं सराहनीय है। कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोना, सभी पक्षों को सुनना, परिस्थिति के अनुरूप निर्णय लेना और मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता देना एक कुशल प्रशासक की पहचान है। जिला पदाधिकारी ने अपने आचरण एवं कार्यशैली से इसका उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनकी यह पहल अन्य जिलों के प्रशासनिक पदाधिकारियों के लिए भी प्रेरणादायक एवं अनुकरणीय है।
इस अवसर पर जिले के चिकित्सा, शिक्षा, सामाजिक, पत्रकारिता, विधि एवं व्यवसाय जगत से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि बलिराजगढ़ जैसी संवेदनशील परिस्थिति में जिला पदाधिकारी द्वारा प्रदर्शित धैर्य, संयम, संवेदनशीलता एवं कुशल नेतृत्व जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनकी कार्यशैली यह संदेश देती है कि प्रभावी प्रशासन केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों की भावनाओं को समझना, उनकी समस्याओं को सुनना, विश्वास कायम करना तथा मानवीय संवेदनाओं के साथ समाधान की दिशा में कार्य करना भी उतना ही आवश्यक है।

प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख रूप से डॉ. आरएस पांडेय, डॉ. डीके झा, डॉ. कुणाल कौशल, डॉ. सुमन, अनिरुद्ध प्रताप चौधरी, छाया मिश्रा, काजी, कमलदेव यादव, टुन्नाश्री, डॉ. नीरज, कर्ण, गुलाब, मृत्युंजय, रंजीत, नीतीश एवं राघव सहित कई समाजसेवी, शिक्षाविद, चिकित्सक, पत्रकार, अधिवक्ता एवं व्यवसायी उपस्थित थे।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version