प्रयागराज संगम स्थल से जानकी जन्मभूमि पहुंचे तीर्थयात्री।
माता सीता जन्मभूमि दर्शन करने आए भक्तों साहित्य प्रेमी ने माता जानकी जन्मभूमि के दर्शन से आत्मविभोर हुए।सीता संवाद आध्यात्मिक एवं साहित्यिक यात्रा के निदेशक आग्नेय कुमार ने सभी यात्रियों को जानकी जन्मभूमि पंच तीर्थ दर्शन कराए।यात्री साहित्यकार संगम प्रयाग राज से आए विशेष अतिथियों ने जानकी जन्मभूमि पुनौराधाम सीतामढ़ी समेत पंच तीर्थ स्थल दर्शन किया।सभी भावविभोर हो गए निःशब्द अभिव्यक्ति मन हर्षित दिखा।सबने जानकी जन्मभूमि पंच तीर्थ दर्शन करने पुनः आने का संकल्प दोहराया।सीता संवाद आध्यात्मिक एवं साहित्यिक यात्रा की ओर से पंच तीर्थ दर्शन पुस्तिका निदेशक आग्नेय कुमार ने प्रदान किया।
कौशल किशोर पाण्डेय ने कहा माता सीता जन्मभूमि शक्ति पीठ है।धर्मेंद्र झा ने श्री रजत द्वार जानकी मंदिर पूजन कर आत्मविभोर हुए।विजय शाही में बाबा हलेश्वर स्थान महादेव मंदिर में दर्शन पूजन कर अपने आपको भाग्यशाली माना।राजा जनक द्वारा पूजित हलेष्टि यज्ञ पूजन स्थल को नमन किया। राकेश सिंह सेंगर ने सीता डोली स्थल पंथ पाकर धाम के दिव्य दर्शन से काफी खुश हुए।झुकी डालियों के बारे। में कहा ये झुककर आज भी श्री राम के आने का इंतजार कर रहा है।सच्ची बात यही है यह श्री राम श्री परशुराम का मिलन हुआ
एक ने जप तप साधना का अर्थ समझा जाना और हिमालय की ओर प्रस्थान किए जो परशुराम कहलाए।एक अर्धांगिनी संग अवध की ओर प्रस्थान किए जो श्री राम कहलाए।सीता डोली स्थल पिंड पूजन माहात्म्य को धारित करता है।इसलिए सीता डोली स्थल को देखकर प्रयागराज से आए साहित्यकार भावविभोर हुए।कौशल किशोर पाण्डेय ने कहा जीवन में इन पांच तीर्थों का दर्शन कर शांति महसूस कर रहा हु।शक्ति भूमि को महसूस कर रहा हु।सबने जानकी जन्मभूमि पुनौराधाम समेत सभी पंच तीर्थ स्थल दर्शन करने के लिए दोबारा आने का संकल्प दोहराया।

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