प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर को देश के अलग-अलग हिस्सों में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किए जाने की अपील की गई है। कई राज्यों में इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। राजस्थान में जारी निर्देशों के मुताबिक 17 सितंबर की शाम 7 बजे दीप प्रज्वलन सहित विभिन्न गतिविधियां प्रस्तावित हैं और कार्यक्रमों के फोटो-वीडियो अपलोड करने को भी कहा गया है।
इस आयोजन की तुलना अयोध्या में भगवान राम के वनवास से लौटने के बाद दीप जलाकर किए गए स्वागत से भी की जा रही है। समर्थकों की ओर से इसे प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से जोड़कर देखा जा रहा है। हरियाणा सरकार की ओर से भी 17 सितंबर को ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने की अपील की गई है।
हालांकि, इस तरह के सरकारी निर्देशों को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर सरकारी विभागों, स्कूलों और अन्य संस्थानों में दीप जलाने जैसे आयोजनों को प्रशासनिक गतिविधियों का हिस्सा बनाने का औचित्य क्या है। कुछ संगठनों ने विद्यार्थियों की भागीदारी को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई है। राजस्थान में PUCL ने इसी मुद्दे पर छात्रों को राजनीतिक गतिविधियों से जोड़ने का आरोप लगाया है।
सरकारी कार्यालयों और स्कूलों को लेकर सवाल
आलोचना का एक प्रमुख बिंदु यह है कि यदि दीप प्रज्वलन का समय शाम 6 से 7 बजे या 7 बजे निर्धारित है, तो सरकारी कार्यालयों में इसे किस तरह आयोजित किया जाएगा। आमतौर पर सरकारी दफ्तरों का नियमित कामकाजी समय समाप्त होने के बाद कर्मचारियों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाया जा रहा है।
इसी तरह दूरदराज के सरकारी स्कूलों और अन्य संस्थानों में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति कैसे सुनिश्चित की जाएगी, यह भी चर्चा का विषय है।
विकास के बजाय प्रतीकात्मक आयोजनों पर बहस
आलोचक यह सवाल भी उठा रहे हैं कि सरकारी व्यवस्था की प्राथमिकता दीप प्रज्वलन जैसे प्रतीकात्मक कार्यक्रम होने चाहिए या शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी भवनों और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े लंबित कार्य।
उनका तर्क है कि कई सरकारी संस्थानों में शिक्षकों की उपलब्धता, भवनों की स्थिति, अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं, दवाओं की उपलब्धता और सरकारी कार्यालयों के रखरखाव जैसे मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में सरकारी संसाधनों और कर्मचारियों का इस्तेमाल इस तरह के आयोजनों में करने को लेकर सार्वजनिक बहस होना स्वाभाविक है।
फोटो-वीडियो और सोशल मीडिया पर भी जोर
सरकारी दिशा-निर्देशों में कार्यक्रमों के फोटो और वीडियो तैयार करने तथा उन्हें संबंधित प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने की बात भी सामने आई है। हरियाणा में जारी प्रशासनिक निर्देशों में अभियान के दौरान गतिविधियों की फोटो-वीडियोग्राफी और सोशल मीडिया के जरिए प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा गया है।
इसी को लेकर आलोचक इसे सरकारी कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार पर अधिक जोर देने वाला कदम बता रहे हैं। दूसरी ओर, आयोजकों और समर्थकों का कहना है कि ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन और जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जनभागीदारी का कार्यक्रम है। हरियाणा सरकार ने भी इसे प्रधानमंत्री की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा को सम्मान देने से जोड़ा है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर दीप प्रज्वलन का कार्यक्रम अब राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का विषय बन गया है। एक तरफ समर्थक इसे जनभागीदारी और सम्मान से जोड़ रहे हैं, वहीं आलोचक सरकारी तंत्र में इस तरह के आयोजन की भूमिका, खर्च और विद्यार्थियों-कर्मचारियों की भागीदारी को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
