पशुपालन विभाग की समीक्षात्मक बैठक: जिला पदाधिकारी श्री रिची पाण्डेय की अध्यक्षता में योजनाओं एवं कार्यक्रमों की गहन समीक्षा!

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बिहार राज्य के एक महत्वपूर्ण जिले में, जहां पशुपालन का कार्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है, एक महत्वपूर्ण समीक्षात्मक बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक समाहरणालय स्थित विमर्श कक्ष में जिला पदाधिकारी श्री रिची पाण्डेय की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले के पशुपालन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा करना था, ताकि इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और पशुपालन के क्षेत्र में प्रगति की दिशा सुनिश्चित की जा सके।

बैठक में जिला पशुपालन पदाधिकारी ने विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने विभाग के विभिन्न कार्यों के निष्पादन की स्थिति की भी समीक्षा की। बैठक में यह स्पष्ट हुआ कि विभाग के कार्यों में कई सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं और इसके परिणामस्वरूप जिले में पशुपालन के क्षेत्र में सुधार हो रहा है।

बैठक की प्रमुख चर्चा और निर्णय

बैठक के दौरान सबसे पहले जिला पशुपालन पदाधिकारी ने पशु चिकित्सालयों और कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि जिले में पशुओं के लिए चिकित्सा सेवाएं, बधियाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण और पैथोलॉजिकल जांच की स्थिति की समीक्षा की गई। इन कार्यों के निष्पादन की प्रक्रिया और परिणामों पर चर्चा की गई।

जिला पशुपालन पदाधिकारी ने यह भी बताया कि आरडीएफ (रूरल डेवलपमेंट फंड) के तहत पांच पशु चिकित्सालयों के भवन निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराई गई थी। इनमें से दो पशु चिकित्सालयों, नानपुर और सुरसंड में भवन निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। एक पशु चिकित्सालय बैरगनिया में निर्माणाधीन है, जबकि दो अन्य पशु चिकित्सालयों, नरंगा और परसौनी के भवन निर्माण के लिए विभाग को आवश्यक प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि दिसंबर 2024 तक जिले में कुल 116,648 पशुओं का उपचार किया गया है। इसके अलावा, बधियाकरण की कुल संख्या 4,185 है, जबकि कृत्रिम गर्भाधान द्वारा लाभान्वित पशुओं की संख्या 11,411 है। विभागीय एम्बुलेटरी निःशुल्क चिकित्सा वैन द्वारा 6,704 पशुओं का इलाज किया गया है। आत्मनिर्भर बिहार योजना के तहत आयोजित पशु बांझपन निवारण शिविर में 4,804 पशुओं का उपचार किया गया है, जो सभी लक्ष्यों के अनुरूप है।

के0सी0सी0 (KCC) योजना पर चर्चा

बैठक के दौरान के0सी0सी0 (कृषि क्रेडिट कार्ड) योजना पर भी विस्तार से चर्चा की गई। जिला पदाधिकारी श्री रिची पाण्डेय ने सभी पशु चिकित्सकों को निर्देश दिया कि वे अधिक से अधिक आवेदन पत्र सृजित कर बैंकों को भेजवाने का कार्य करें। यह योजना पशुपालकों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए बनाई गई है, ताकि वे अपनी पशुपालन गतिविधियों को और बेहतर तरीके से चला सकें।

समेकित बकरी एवं भेड़ विकास योजना और समेकित मुर्गा विकास योजना

बैठक में समेकित बकरी एवं भेड़ विकास योजना और समेकित मुर्गा विकास योजना के बारे में भी विस्तार से चर्चा की गई। संबंधित नोडल पदाधिकारियों ने इन योजनाओं के तहत किए गए कार्यों और उनके परिणामों के बारे में जानकारी दी। जिला नोडल पदाधिकारी ने बताया कि अब तक सुकर विकास योजना के तहत 39 आवेदन एकत्रित किए गए हैं, जिनकी स्क्रीनिंग की प्रक्रिया चल रही है। जिला पदाधिकारी ने इस पर संतोष व्यक्त करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

21वीं अखिल भारतीय पशु गणना

बैठक में 21वीं अखिल भारतीय पशु गणना पर भी चर्चा की गई। यह एक महत्वपूर्ण कार्य है, जो पूरे देश में पशुओं की संख्या और उनकी स्थिति का आंकलन करता है। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे इस कार्य को 28 फरवरी 2025 तक पूरा करें, ताकि पशुपालन विभाग को जिले के पशुओं की सही स्थिति का पता चल सके और भविष्य की योजनाओं को उसी के आधार पर तैयार किया जा सके।

बैठक में उपस्थित अधिकारीगण

इस बैठक में जिला पशुपालन पदाधिकारी प्रेम झा के साथ सभी प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थे। इन अधिकारियों ने बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों को ध्यानपूर्वक सुना और अपने-अपने क्षेत्रों में इनका पालन करने का संकल्प लिया। बैठक के दौरान सभी ने मिलकर यह तय किया कि जिले में पशुपालन के क्षेत्र में और अधिक सुधार लाने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।

निष्कर्ष

जिला पदाधिकारी श्री रिची पाण्डेय की अध्यक्षता में आयोजित यह समीक्षात्मक बैठक जिले में पशुपालन के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की समीक्षा और सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है। पशुपालन विभाग द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन जिले के पशुपालकों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है। इस प्रकार की बैठकें न केवल योजनाओं की सफलता को सुनिश्चित करती हैं, बल्कि प्रशासन और विभाग के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित करती हैं, जिससे पूरे जिले में पशुपालन के क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है।

इस बैठक ने यह भी साबित किया कि जब अधिकारी और विभाग एकजुट होकर कार्य करते हैं, तो किसी भी योजना को सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती। आगे आने वाले समय में जिले में पशुपालन के क्षेत्र में और अधिक सुधार की संभावना है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पशुपालकों की स्थिति में सुधार होगा।

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