पटना नगर निगम की कार्रवाई के खिलाफ बुद्ध मूर्ति रोड के मुसहर परिवारों का धरना, विधायक और भाकपा माले नेताओं का समर्थन!

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पटना नगर निगम द्वारा बुद्ध मूर्ति रोड के किनारे बसे लगभग 100 मुसहर परिवारों को उनके घरों से बेदखल किए जाने के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। ये परिवार अब सड़क पर धरना देकर अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। धरना स्थल के नजदीक आयुर्वेदिक कॉलेज स्थित है, जहां प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने के लिए विभिन्न नेता और सामाजिक कार्यकर्ता पहुंचे हैं।


धरना स्थल पर नेताओं की उपस्थिति

इस धरने में फुलवारी शरीफ के विधायक गोपाल रविदास और भाकपा माले के नेता कामरेड रण विजय कुमार, विभा गुप्ता और संजय यादव ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इन नेताओं ने नगर निगम की कार्रवाई को गरीब विरोधी और असंवेदनशील बताया।

विधायक गोपाल रविदास ने कहा, “यह घटना मुसहर समुदाय के प्रति सरकार की उदासीनता और असंवेदनशीलता को दर्शाती है। इन परिवारों के पास न तो रहने के लिए घर है और न ही उनके पुनर्वास की कोई व्यवस्था की गई है। हम इस अन्याय के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।”


मुसहर परिवारों की दुर्दशा

मुसहर समुदाय बिहार के सबसे गरीब और वंचित वर्गों में से एक है। ये परिवार दशकों से बुद्ध मूर्ति रोड के किनारे बसे हुए हैं। अधिकांश लोग दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और उनकी आय का मुख्य स्रोत ईंट भट्टों और निर्माण स्थलों पर काम करना है।

धरना पर बैठी 55 वर्षीय महिला मीरा देवी ने कहा, “हमारे पास कोई और जगह नहीं है। यह जगह हमारे लिए घर है। अब हमें यहां से बेदखल किया जा रहा है, लेकिन हमें रहने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं दी गई।”


नगर निगम का पक्ष

पटना नगर निगम का कहना है कि यह अतिक्रमण हटाने की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। निगम के अधिकारियों के अनुसार, ये घर अवैध रूप से सड़क किनारे बनाए गए हैं और इससे यातायात और सार्वजनिक सुविधाओं में बाधा उत्पन्न हो रही है।

नगर निगम के एक अधिकारी ने कहा, “हमने इन परिवारों को पहले ही नोटिस जारी कर दिया था। यह जमीन सार्वजनिक उपयोग के लिए है, और इसे खाली कराना हमारी जिम्मेदारी है।”

धरने में उठाए गए मुद्दे

धरने में शामिल भाकपा माले नेता कामरेड रण विजय कुमार ने कहा, “नगर निगम की यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है, जो हर नागरिक को जीवन और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है। सरकार को चाहिए कि वह पहले इन परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था करे, फिर इस तरह की कार्रवाई करे।”

धरना स्थल पर कई सामाजिक संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया। विभा गुप्ता ने कहा, “यह केवल मुसहर परिवारों की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है कि वह वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा करे।”

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

आसपास के इलाकों के लोगों ने भी इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इन परिवारों ने कभी किसी को परेशान नहीं किया और वे शांतिपूर्ण ढंग से अपने जीवनयापन कर रहे थे।

स्थानीय निवासी राजेश कुमार ने कहा, “सरकार को गरीबों की मदद करनी चाहिए, न कि उन्हें बेघर करना चाहिए। यह कार्रवाई अमानवीय है।”

धरने का असर और आगे की रणनीति

धरना स्थल पर भारी भीड़ जुटी हुई है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे धरना जारी रखेंगे।

संजय यादव ने कहा, “हम नगर निगम को चेतावनी देते हैं कि अगर यह कार्रवाई तुरंत नहीं रोकी गई और पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की गई, तो हम बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे।”


संवेदनशील मुद्दा और समाधान की जरूरत

बुद्ध मूर्ति रोड पर चल रहे इस धरने ने एक बार फिर बिहार में गरीबों और वंचितों के अधिकारों की अनदेखी को उजागर किया है। यह घटना केवल मुसहर समुदाय की समस्या नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाती है कि विकास और शहरीकरण के नाम पर गरीबों को कब तक कुचला जाएगा।

सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे इन परिवारों के पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाएं और सुनिश्चित करें कि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय न हो। धरने पर बैठे लोगों की मांगें पूरी होने तक यह मुद्दा पटना में चर्चा का केंद्र बना रहेगा।

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