बिहार के सीतामढ़ी जिले ने विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए नीति आयोग की आकांक्षी जिलों की डेल्टा रैंकिंग (मार्च 2026) में पूरे देश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि जिले में विभिन्न विकासात्मक क्षेत्रों में किए गए सतत प्रयासों, प्रभावी प्रशासनिक नेतृत्व, विभागीय समन्वय और तकनीकी सहयोग का परिणाम मानी जा रही है। इस सफलता से न केवल सीतामढ़ी बल्कि पूरे बिहार का गौरव बढ़ा है।
इस उपलब्धि के बाद कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव एवं सीतामढ़ी आकांक्षी जिला के नोडल पदाधिकारी संजय अग्रवाल (IAS) ने जिले में आकांक्षी जिला एवं आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम की प्रगति की विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में जिलाधिकारी रिची पांडेय, उप विकास आयुक्त संदीप कुमार, जिला योजना पदाधिकारी एवं नोडल अधिकारी संतोष कुमार सुमन, सहायक योजना पदाधिकारी अमित कुमार सहित स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, ICDS, बैंकिंग, पशुपालन, कौशल विकास और अन्य विभागों के जिला एवं प्रखंड स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे। पिरामल फाउंडेशन की ओर से जिला प्रबंधक प्रभाकर कुमार और कार्यक्रम लीड अभिषेक राज ने भी बैठक में भाग लिया।
बैठक के दौरान सभी विभागों ने आकांक्षी जिला एवं आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम के तहत प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (KPIs) पर हुई प्रगति, उपलब्धियों और भविष्य की कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। अधिकारियों ने विभिन्न क्षेत्रों में सुधार की संभावनाओं और बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने पर विशेष जोर दिया।
जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि, वानिकी, पशुपालन, जल प्रबंधन, आधारभूत संरचना, क्षमता निर्माण और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में लगातार सुधारात्मक और नवाचारी पहल की गई है। इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव नीति आयोग की डेल्टा रैंकिंग में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
रैंकिंग के अनुसार, आधारभूत संरचना (Infrastructure) के क्षेत्र में सीतामढ़ी ने सबसे उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की। इस क्षेत्र में जिले का डेल्टा स्कोर 47.3 से बढ़कर 65.8 पहुंच गया, जिसके आधार पर जिले को राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान मिला। वहीं कृषि, वानिकी, पशुपालन एवं जल प्रबंधन के क्षेत्र में डेल्टा स्कोर 39.7 से बढ़कर 50.2 हो गया, जिससे जिले को देशभर में चौथा स्थान प्राप्त हुआ।
स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में भी जिले ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। इस श्रेणी में डेल्टा स्कोर 71.6 से बढ़कर 83.5 तक पहुंचा और सीतामढ़ी ने राष्ट्रीय स्तर पर 15वां स्थान हासिल किया। इसके अलावा शिक्षा, वित्तीय समावेशन और क्षमता वर्धन जैसे क्षेत्रों में भी जिले ने निरंतर सुधार दर्ज किया।
समीक्षा बैठक में संजय अग्रवाल (IAS) ने जिलाधिकारी रिची पांडेय के नेतृत्व में किए जा रहे नवाचारों, नियमित अनुश्रवण और विकास के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद सीतामढ़ी ने विकास के विभिन्न मानकों पर उल्लेखनीय सुधार कर देश के अन्य आकांक्षी जिलों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों की टीम भावना और समर्पण की भी प्रशंसा की।
जिलाधिकारी रिची पांडेय ने इस उपलब्धि का श्रेय सभी विभागों के सामूहिक प्रयास, नियमित समीक्षा, डेटा आधारित कार्यप्रणाली और बेहतर समन्वय को दिया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन भविष्य में भी प्रत्येक विकास संकेतक पर बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा।
बैठक में पिरामल फाउंडेशन द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे तकनीकी सहयोग, क्षमता निर्माण, डेटा विश्लेषण और विकासात्मक कार्यक्रमों के अनुश्रवण की भी सराहना की गई। अधिकारियों ने कहा कि प्रशासन और विकास सहयोगी संस्थाओं के बीच मजबूत तालमेल से जिले को निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण सहायता मिल रही है।
