पटना हाईकोर्ट ने दिव्यांग आश्रित बच्चों के हित में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पेंशनर माता-पिता के जीवित रहते ही दिव्यांग संतान का नाम पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) में दर्ज किया जा सकता है। इसके लिए माता-पिता की मृत्यु तक इंतजार करना जरूरी नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि पीपीओ में नाम दर्ज करना महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया है। इससे दिव्यांग संतान को तत्काल पारिवारिक पेंशन का भुगतान शुरू नहीं होता। ऐसे में नाम दर्ज कराने के लिए माता-पिता की मृत्यु तक इंतजार कराना उचित नहीं माना जा सकता।

50 प्रतिशत दिव्यांग बेटे का नाम जोड़ने की थी मांग

यह फैसला सोनपुर, सारण निवासी सेवानिवृत्त चपरासी रामानंद राय की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। उन्होंने अपने 50 प्रतिशत लोकोमोटर दिव्यांगता से पीड़ित बेटे दीपक कुमार पुष्पेन्द्र का नाम पीपीओ में दर्ज कराने की मांग की थी।मामले की सुनवाई न्यायाधीश पूर्णेन्दु सिंह की एकलपीठ ने की। वित्त विभाग और महालेखाकार कार्यालय की ओर से तर्क दिया गया था कि दिव्यांग संतान के पारिवारिक पेंशन के अधिकार पर माता-पिता की मृत्यु के बाद ही विचार किया जा सकता है।

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