तिरहुत स्नातक क्षेत्र में दिलचस्प हुई जंग, अभिषेक झा की पकड़ मजबूत*
*बैलेट पेपर पर पहले स्थान पर रहने वाले अभिषेक झा निर्णायक बढ़त की ओर*
*मुजफ्फरपुर ।* तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, मुकाबला उतना ही रोचक होता जा रहा है। इस बार चुनावी मैदान में कुल 17 उम्मीदवार हैं, लेकिन संघर्ष की तस्वीर चार प्रमुख उम्मीदवारों के बीच ही उभरती दिख रही है। एनडीए प्रत्याशी अभिषेक झा, राजद उम्मीदवार डॉ रश्मि गौतम, जनसुराज के विमोहन और निवर्तमान एमएलसी बंशीधर बृजवासी के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है। बैलेट पेपर पर पहले स्थान पर दर्ज अभिषेक झा अपनी स्थिति और मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। उनके सामने मुख्य चुनौती डॉ रश्मि गौतम और बंशीधर बृजवासी से मानी जा रही है। वहीं, जनसुरज के विमोहन भी चुनावी समीकरण साधने की कोशिश कर रहे हैं।
चुनाव हो और जातीय गणित की चर्चा न हो, ऐसा संभव नहीं। इस चुनाव में भी जातीय समीकरणों को लेकर उम्मीदवारों की रणनीति चर्चा में है। सभी की नजर अपने-अपने स्वजातीय मतदाताओं पर टिकी है। विमोहन और डॉक्टर रश्मि गौतम भूमिहार समाज से आते हैं। ऐसे में दोनों की निगाहें भूमिहार मतदाताओं पर हैं। हालांकि, राजद से पारंपरिक रूप से दूरी बनाए रखने वाले भूमिहार मतदाता डॉ रश्मि की ओर कितना रुख करेंगे, इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। रही बात विमोहन की, तो लोग उन्हें रेस में ही नहीं मान रहे हैं। ऐसे में भूमिहार मतदाताओं का भी एकमुश्त मत अभिषेक झा की झोली में गिर जाए तो कोई आश्चर्य नहीं। डॉ रश्मि गौतम राजद के परंपरागत वोट बैंक के सहारे चुनावी मैदान में हैं, लेकिन अभिषेक झा इस वोट बैंक में भी सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। अभिषेक झा के एक समर्थक का दावा है कि भारी संख्या में यादव समाज के मतदाता उनके पक्ष में मतदान करेंगे। उनका कहना है कि सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर और वैशाली में अभिषेक झा ने जिन मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाई है, उनमें यादव समाज के भी हजारों मतदाता शामिल हैं। वहीं, उर्दू शिक्षकों के हित में सरकार के फैसले के बाद एनडीए को चुनावी लाभ मिलना तय है। अभिषेक झा के समर्थकों का मानना है कि इस फैसले से तिरहुत के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी एनडीए की स्थिति मजबूत हुई है।अल्पसंख्यक मतदाता खुलकर अभिषेक झा के समर्थन में आ गए हैं। मुस्लिम समुदाय के नेता उनके समर्थन में सभाएं कर रहे हैं। दूसरी ओर निवर्तमान एमएलसी बृजवासी के सामने अपनी सीट बचाने की चुनौती है। इस बार उनके लिए मुकाबला आसान नहीं माना जा रहा है। चुनावी चर्चाओं में उनकी स्थिति को लेकर तरह-तरह के आकलन किए जा रहे हैं । डॉ रश्मि को पीछे छोड़कर मुकाबले में अपनी स्थिति मजबूत करने की उनकी कोशिश भी चर्चा का विषय बनी हुई है। बहरहाल, सभी की निगाहें 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान पर टिकी हैं। उम्मीदवारों और उनके समर्थकों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। चुनाव का परिणाम 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन, इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह है कि बैलेट पेपर पर पहले स्थान पर रहने वाले अभिषेक झा के समर्थक अभी से नतीजों में भी उनके पहले पायदान पर रहने का दावा कर रहे हैं।
