सगुना मोड़, पटना:
बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं में से एक, दही-चूड़ा भोज, का आयोजन आज डॉ. विमल कुमार जी के विमल हॉस्पिटल, सगुना मोड़, दानापुर, पटना में किया गया। इस अवसर पर न केवल क्षेत्रीय नागरिकों ने बल्कि समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों, चिकित्सकों, समाजसेवियों, और अधिकारियों ने भी भाग लिया। सामूहिक भोज के इस आयोजन में उपस्थित लोगों ने न केवल पारंपरिक भोजन का आनंद लिया, बल्कि एक-दूसरे से संवाद कर सामाजिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाया।
आयोजन की मुख्य झलकियां:
आयोजन स्थल पर पारंपरिक माहौल और हर्षोल्लास की झलक स्पष्ट रूप से देखी जा सकती थी। आयोजन की शुरुआत मुख्य अतिथियों के स्वागत और भोज की महत्ता पर चर्चा के साथ हुई। भोज में शामिल होने वाले गणमान्य व्यक्तियों में डॉ. मनीष मंडल (अधीक्षक, IGIMS, पटना), डॉ. विनय कुमार, डॉ. सुनील राय, डॉ. संगीता चौधरी, डॉ. सुधीर यादव, और डॉ. माधव जी प्रमुख थे।
इसके अतिरिक्त, मनेर के विधायक भाई वीरेंद्र जी और श्याम नंदन कुमार यादव (राष्ट्रीय महासचिव, ऑल इंडिया यादव महासभा) ने भी अपनी उपस्थिति से आयोजन की शोभा बढ़ाई।
दही-चूड़ा भोज की सांस्कृतिक महत्ता:
दही-चूड़ा भोज न केवल बिहार की परंपरा का हिस्सा है, बल्कि यह लोगों को एक साथ लाने और आपसी मेलजोल बढ़ाने का भी प्रतीक है। मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित यह भोज समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाता है। इस आयोजन के माध्यम से न केवल भोज का आनंद लिया गया, बल्कि समाज में एकता और सद्भाव का संदेश भी दिया गया।

भोज में शामिल व्यंजन और उनकी विशेषताएं:
इस आयोजन में पारंपरिक व्यंजनों की भरमार थी। दही-चूड़ा के साथ गुड़, तिलकुट, और अचार जैसे स्वादिष्ट व्यंजन परोसे गए। भोज के दौरान हर किसी ने इन व्यंजनों का भरपूर आनंद लिया। साथ ही, आयोजन में स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की झलक भी देखने को मिली।
मुख्य अतिथियों के विचार:
इस अवसर पर कई प्रमुख व्यक्तियों ने अपने विचार साझा किए:
- डॉ. मनीष मंडल ने कहा, “दही-चूड़ा भोज हमारी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। ऐसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं।”
- भाई वीरेंद्र, विधायक मनेर ने कहा, “यह भोज समाज के सभी वर्गों को एकजुट करने का माध्यम है। हमें इस तरह के आयोजनों को बढ़ावा देना चाहिए।”
- श्याम नंदन कुमार यादव ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा, “यह आयोजन न केवल सामाजिक मेलजोल का प्रतीक है, बल्कि हमारी परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का भी एक प्रयास है।”
चिकित्सा और समाजसेवा का संगम:
डॉ. विमल कुमार और उनकी टीम ने न केवल चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान दिया है, बल्कि समाजसेवा में भी अपनी अहम भूमिका निभाई है। यह आयोजन उनके समर्पण और समाज के प्रति उनके दृष्टिकोण का प्रतीक है।
सामूहिक भोज का प्रभाव:
इस आयोजन ने न केवल स्थानीय नागरिकों को एक साथ आने का अवसर दिया, बल्कि समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भी आपस में संवाद करने और विचारों का आदान-प्रदान करने का मंच प्रदान किया।
समाप्ति:
दही-चूड़ा भोज का यह आयोजन एक सफल सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम के रूप में संपन्न हुआ। उपस्थित लोगों ने इसे न केवल मनोरंजक बल्कि प्रेरणादायक भी बताया। इस तरह के आयोजन समाज को एकजुट करने और परंपराओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आशा है कि भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन होते रहेंगे, जो समाज में एकता और समरसता को बढ़ावा देंगे।