डीएम की संवेदनशील पहल से नवजात बच्ची को मिला नया जीवन, त्वरित कार्रवाई से सुरक्षित रेस्क्यू कर अस्पताल में कराया गया भर्ती

लावारिस अवस्था में मिली नवजात बच्ची के प्रति जिला पदाधिकारी ने दिखाई संवेदनशीलता, बाल संरक्षण इकाई को तत्काल आवश्यक कार्रवाई का दिया निर्देश

बच्चों को असहाय अवस्था में न छोड़े, किसी जरूरतमंद बच्चे की जानकारी मिले तो तत्काल प्रशासन को दें सूचना-डीएम
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मधुबनी
10अक्टूबर,2026

बच्चों का जीवन अनमोल है और उनकी सुरक्षा, संरक्षण एवं बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी एवं कर्तव्य है। इसी मानवीय संवेदनशीलता एवं बाल संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए जिला पदाधिकारी श्री आनंद शर्मा के त्वरित निर्देश पर मधुबनी जिले में झाड़ी में मिली एक नवजात बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू कर अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिला प्रशासन की तत्परता से बच्ची को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सकी।
विदित हो कि 09 अक्टूबर 2026 को बिस्फी प्रखंड के औंसी थाना अंतर्गत जीरो माइल के समीप झाड़ी में लगभग 10 दिन की एक नवजात बच्ची पड़ी हुई मिली। बच्ची के मिलने की सूचना पर ग्रामीणों की भीड़ एकत्रित हो गई। मौके पर पहुंचे एक चिकित्सक ने नवजात को अस्पताल में भर्ती कराकर उसका उपचार शुरू कराया। इसी बीच एक ग्रामीण द्वारा जिला पदाधिकारी श्री आनंद शर्मा को मोबाइल फोन पर नवजात बच्ची के झाड़ी में पड़े होने की सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही जिला पदाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला बाल संरक्षण इकाई को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उनके निर्देश पर जिला बाल संरक्षण इकाई ने त्वरित पहल करते हुए औंसी थाना के सहयोग से नवजात बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू कराया। इसके बाद बाल संरक्षण इकाई के पदाधिकारियों ने बच्ची को बाल कल्याण समिति, मधुबनी के समक्ष प्रस्तुत करते हुए सदर अस्पताल, मधुबनी के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया, जहां उसे आवश्यक चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई।
इस प्रकार जिला पदाधिकारी की संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय एवं संबंधित पदाधिकारियों की सक्रियता से संकटग्रस्त नवजात बच्ची को समय पर संरक्षण एवं चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सकी। यह घटना दर्शाती है कि संवेदनशील प्रशासनिक पहल और आम नागरिकों की सजगता से किसी जरूरतमंद बच्चे की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है।

जिला पदाधिकारी श्री आनंद शर्मा ने आम नागरिकों से अपील की है कि प्रत्येक बच्चे का जीवन अनमोल है। किसी भी नवजात या बच्चे को असहाय अवस्था में देखे जाने पर उसे नजरअंदाज न करें और न ही स्वयं कोई जोखिमपूर्ण कदम उठाएं। तत्काल स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन अथवा बाल संरक्षण इकाई को इसकी सूचना दें, ताकि बच्चे को शीघ्र सुरक्षित संरक्षण, चिकित्सा सुविधा एवं आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराई जा सके।
उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश कोई परिवार नवजात बच्चे की परवरिश करने में असमर्थ है, तो बच्चे को असुरक्षित स्थिति में छोड़ने के बजाय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत बाल कल्याण समिति एवं संबंधित बाल संरक्षण तंत्र से संपर्क करना चाहिए। इससे बच्चे के जीवन, स्वास्थ्य एवं भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

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