जिला पदाधिकारी रिची पाण्डेय ने सीतामढ़ी में विद्युत शवदाह गृह निर्माण स्थल का निरीक्षण किया, दिए आवश्यक निर्देश!

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सीतामढ़ी, बिहार।
जिला पदाधिकारी श्री रिची पाण्डेय ने शुक्रवार को सीतामढ़ी शहर के राजोपट्टी स्थित लखनदेई नदी के किनारे प्रस्तावित मुक्तिधाम में विद्युत शवदाह गृह के निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण नगर के नागरिकों को आधुनिक और स्वच्छ अंत्येष्टि सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। निरीक्षण के दौरान जिला पदाधिकारी ने निर्माण कार्य की प्रगति, स्थल की उपयुक्तता और नक्शे के अनुसार परियोजना के क्रियान्वयन का जायजा लिया।


विद्युत शवदाह गृह का उद्देश्य

परंपरागत अंतिम संस्कार प्रक्रियाओं में समय और संसाधनों की खपत अधिक होती है, साथ ही पर्यावरण पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस संदर्भ में, विद्युत शवदाह गृह एक स्वच्छ, पर्यावरण-संवेदनशील और आधुनिक विकल्प के रूप में उभर रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य सीतामढ़ी के नागरिकों को एक सुलभ, स्वच्छ और समय-बचत करने वाला अंतिम संस्कार विकल्प प्रदान करना है।


निरीक्षण के दौरान महत्वपूर्ण बिंदु

निरीक्षण के दौरान जिला पदाधिकारी ने स्थल की साफ-सफाई और निर्माण से संबंधित व्यवहारिक कठिनाइयों पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि निर्माण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा न आए और परियोजना समय पर पूरी हो।

नगर आयुक्त प्रमोद कुमार पांडे, अंचल अधिकारी डुमरा डॉली झा और कनीय अभियंताओं ने जिला पदाधिकारी को नक्शे और तकनीकी पहलुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जिला पदाधिकारी ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे परियोजना के दौरान आने वाली व्यवहारिक चुनौतियों का समय पर समाधान करें।


निर्देश और सुझाव

निरीक्षण के दौरान जिला पदाधिकारी ने निम्नलिखित निर्देश दिए:

  1. साफ-सफाई पर विशेष ध्यान: स्थल की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए नियमित सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।
  2. पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन: विद्युत शवदाह गृह के निर्माण के दौरान पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव सुनिश्चित करने की बात कही गई।
  3. स्थानीय नागरिकों की भागीदारी: परियोजना के बारे में स्थानीय नागरिकों को जागरूक करने और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
  4. समयबद्ध क्रियान्वयन: परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए अधिकारियों को स्पष्ट समय सीमा दी गई।
  5. सुविधाओं का विस्तार: शवदाह गृह के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं, जैसे पेयजल और बैठने की व्यवस्था, का भी प्रावधान करने के निर्देश दिए गए।

परियोजना की संभावनाएं और चुनौतियां

यह परियोजना न केवल सीतामढ़ी के नागरिकों को एक बेहतर अंतिम संस्कार सुविधा प्रदान करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम होगी। हालांकि, इसके क्रियान्वयन में कई चुनौतियां भी हैं, जैसे तकनीकी बाधाएं, स्थानीय लोगों की जागरूकता की कमी, और निर्माण के दौरान आने वाली वित्तीय व प्रशासनिक समस्याएं।


स्थानीय जनता की प्रतिक्रिया

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन के इस कदम की सराहना की है। उनका मानना है कि विद्युत शवदाह गृह न केवल एक आधुनिक सुविधा है, बल्कि इससे परंपरागत अंतिम संस्कार प्रक्रियाओं में लगने वाले समय और संसाधनों की खपत भी कम होगी।

एक स्थानीय निवासी ने कहा, “यह पहल सीतामढ़ी के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे पर्यावरण प्रदूषण में कमी आएगी और हमें स्वच्छता का एक नया विकल्प मिलेगा।”


भविष्य की योजनाएं

जिला प्रशासन ने संकेत दिया है कि परियोजना पूरी होने के बाद इसे और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही, स्थानीय नागरिकों को इसके उपयोग के लिए प्रशिक्षित करने और जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने की योजना है।


निष्कर्ष

सीतामढ़ी में विद्युत शवदाह गृह का निर्माण न केवल आधुनिकता और स्वच्छता की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास की एक मिसाल भी बनेगा। जिला पदाधिकारी रिची पाण्डेय के नेतृत्व में इस परियोजना का निरीक्षण और दिशा-निर्देश यह सुनिश्चित करेंगे कि यह कार्य समय पर और प्रभावी तरीके से पूरा हो।

नगर आयुक्त, अंचल अधिकारी, और कनीय अभियंताओं की सक्रिय भागीदारी से यह उम्मीद की जा रही है कि सीतामढ़ी जल्द ही एक स्वच्छ और आधुनिक अंत्येष्टि स्थल के रूप में उभरेगा।

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