पंजाब के बठिंडा में जज के नाम पर 30 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के चर्चित मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने बिचौलिए सतनाम सिंह को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज करते हुए साफ कहा कि आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं और ऐसे मामलों में नरमी बरतना न्यायिक व्यवस्था की साख को प्रभावित कर सकता है।
दरअसल, बुटेरला निवासी सतनाम सिंह को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 14 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट के वकील जतिन सलवान के साथ गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों एक तलाक से जुड़े मामले में कथित तौर पर जज के नाम पर 30 लाख रुपये की रिश्वत मांग रहे थे। आरोप है कि यह रकम केस में अनुकूल फैसला दिलाने के नाम पर मांगी गई थी।
मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह केवल रिश्वतखोरी का मामला नहीं, बल्कि न्यायिक प्रणाली में हस्तक्षेप का गंभीर प्रयास है। यदि ऐसे आरोपियों को जमानत दे दी जाती है, तो इससे आम जनता का न्यायपालिका पर विश्वास कमजोर पड़ सकता है।
अदालत ने यह भी माना कि प्रथम दृष्टया आरोपों में पर्याप्त गंभीरता है और जांच अभी भी महत्वपूर्ण चरण में है। ऐसे में आरोपी को जमानत देना जांच को प्रभावित कर सकता है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सीबीआई की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने खुद को प्रभावशाली बताते हुए जज तक पहुंच होने का दावा किया था और उसी आधार पर रिश्वत की मांग की गई। इस पूरे मामले ने न्यायिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल सतनाम सिंह न्यायिक हिरासत में है और मामले की आगे की सुनवाई जारी है। अदालत के इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है, जो यह संदेश देता है कि न्याय व्यवस्था में किसी भी प्रकार की दलाली या हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
