पटना। बिहार के सहायता प्राप्त मदरसों और संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को कथित तौर पर पिछले छह महीने से वेतन नहीं मिलने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। वेतन भुगतान में देरी को लेकर शिक्षकों में आर्थिक परेशानी के साथ असंतोष भी बढ़ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर मदरसा डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (MDO) के आह्वान पर सोमवार को पटना के IMA हॉल में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से मदरसा और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक तथा संगठन के पदाधिकारी शामिल हुए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान MDO ने राज्य सरकार से छह महीने से लंबित वेतन का तत्काल भुगतान करने और शिक्षकों की अन्य लंबित मांगों पर ठोस निर्णय लेने की मांग की। संगठन के पदाधिकारियों का कहना था कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण कई शिक्षक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। रोजमर्रा के खर्च, बच्चों की शिक्षा, इलाज और परिवार की अन्य जरूरतों को पूरा करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।

MDO ने सरकार से तत्काल वेतन भुगतान की मांग की

MDO की ओर से कहा गया कि शिक्षकों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकार को लंबित वेतन के भुगतान में और देरी नहीं करनी चाहिए। संगठन ने शिक्षकों की अन्य मांगों पर भी सरकार से स्पष्ट और ठोस पहल की मांग की।

MDO के महासचिव महताब आलम ने कहा कि पिछले वर्ष सितंबर में संगठन ने मदरसा शिक्षकों के अधिकारों को लेकर बड़ा आंदोलन किया था। उस समय वार्षिक वेतन वृद्धि, आवास भत्ता, चिकित्सा भत्ता और मदरसों को अल्पसंख्यक विद्यालय का दर्जा देने सहित कई मांगें सरकार के समक्ष रखी गई थीं।

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मिले आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त किया गया था, लेकिन करीब एक वर्ष बीतने के बावजूद संगठन के अनुसार इन मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जांच के नाम पर शिक्षकों का वेतन रोकना उचित नहीं है।

महीने के अंत तक फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

MDO के प्रदेश प्रवक्ता मनाज़िरुल इस्लाम ने कहा कि छह महीने से वेतन का इंतजार कर रहे शिक्षकों की समस्या को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि संगठन प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सरकार से स्पष्ट जवाब और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस महीने के अंत तक शिक्षकों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगा।

मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को ज्ञापन देने का दावा

MDO के कोऑर्डिनेटर शफी अंसारी ने कहा कि जिला स्तर पर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब राज्य स्तर पर शिक्षकों की आवाज को मजबूती से उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मदरसा और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक अपने अधिकारों के लिए एकजुट हैं।

राशिद जमाल, बेतिया ने सरकार से आश्वासन से आगे बढ़कर ठोस निर्णय लेने और लंबित वेतन का अविलंब भुगतान करने की मांग की। वहीं मौलाना अल्ताफ हुसैन, मधुबनी ने कहा कि पिछले वर्ष आंदोलन के दौरान किए गए वादों पर अब तक कार्रवाई नहीं होना चिंता का विषय है।

संगठन की ओर से बताया गया कि वेतन भुगतान समेत शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं को लेकर जिला और राज्य स्तर पर कई बार मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन दिए जा चुके हैं। हाल में जिला स्तर पर भी डीएम और डीईओ के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री को सामूहिक ज्ञापन भेजे जाने की बात कही गई।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ी संख्या में शिक्षक रहे मौजूद

MDO ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों और मदरसा-संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों का आभार जताया। संगठन ने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं और उनकी मांगों को सरकार एवं आम जनता तक पहुंचाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है।

कार्यक्रम में मुंबशीर आलम, फारूक नदवी, जफर रेजा, मो. अजमल, मो. जाहिद हुसैन, अरमान अली, मौलाना जियाउर्रहमान कासमी, अनिल झा, रमन कुमार सिंह, रिजवानुल हक, तनवीर आलम, एहसानुल्लाह और अशरफ रहमानी समेत बड़ी संख्या में शिक्षक एवं संगठन के सदस्य मौजूद रहे।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version