गलत फहमी दूर कर लीजिए इजराइल अमेरिका ओर ईरान का युद्ध कोई धर्म का मामला नहीं बल्कि यह परमाणु हथियार बनाने का मामला है, क्योंकि ईरान परमाणु हथियार विकसित करना चाहता है ओर इजराइल इसे अपने अस्तित्व के लिए खतरा समझकर ईरान को रोकना चाहता है।

बात 1995 से स्टार्ट होती है तबसे इजराइल के अनुसार ईरान कभी परमाणु हथियार बनाने से केवल हफ्ते भर दूर, कभी महीने भर दूर, कभी कुछ महीने भर दूर, कभी कुछ घंटों दूर रहा है ओर अभी तक ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं कर पाया है ओर ईरान पर परमाणु हथियार बनाने का आरोप लगाकर अमेरिका इजराइल समय समय पर ईरान पर बमबारी करके कभी उसके परमाणु ठिकानों को, अस्पतालों को, रिहायशी इलाकों को, स्कूलों को नष्ट करते रहे।

इसके बावजूद इजराइल के पास परमाणु हथियार होने की बात मानी जाती है, ओर ईरान अभी विकसित नहीं कर सका है फिर भी इंसानियत के दुश्मनों को खतरा लग रहा है।

दरअसल अमेरिका इजराइल को तमाम दुनिया पर अपना प्रभाव बनाए रखना है इसलिए वो ईरान को हर हद तक रोकने की कोशिश कर रहे है, क्योंकि मिडिल ईस्ट में ईरान के पास परमाणु होना मिडिल ईस्ट में इजराइल का वर्चस्व खत्म होना।

ईरानी जनता को आंदोलन द्वारा उसकी सरकार के खिलाफ भड़काना ओर फिर सैन्य कार्रवाई करके ईरान को तोड़ देना, उसके सैन्य ठिकानों को नष्ट कर देना, उसके स्कूलों को खत्म कर देना, उसके अस्पतालों को खत्म करना, उसके सुप्रीम लीडर को मार देना, ईरान की टॉप लीडरशिप को मार के खत्म कर देना फिर तमाम प्रतिबंध लगाकर आर्थिक रूप से कमजोर करना ईरान के लिए यही नीति हैं।

शायद ईरान की जनता अमेरिका की ईरान के खिलाफ इस नीति को जल्द समझेगी।

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