पटना जिले के खुसरूपुर थाना क्षेत्र में दर्ज एक आपराधिक मामले को लेकर आरोपी पक्ष ने थाना पुलिस और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संबंधित व्यक्ति का आरोप है कि उसके विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी और बाद में हुए पुलिस पर्यवेक्षण की प्रक्रिया बिना उसका पक्ष सुने पूरी कर ली गई।

आरोप लगाने वाले व्यक्ति के अनुसार, 21 मार्च 2026 की रात उसने थाना प्रभारी को एक स्थानीय जनप्रतिनिधि के खिलाफ कथित अपमानजनक व्यवहार और धमकी से जुड़ी शिकायत की जानकारी दी थी। उसका दावा है कि थाना प्रभारी ने उसे लिखित आवेदन देने के लिए कहा, जिसके बाद उसने आवेदन व्हाट्सएप के माध्यम से भेजा और बाद में लिखित आवेदन भी उपलब्ध कराया। शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि मिलने के बावजूद उसे आगे की कार्रवाई की जानकारी नहीं दी गई।

संबंधित व्यक्ति के मुताबिक, 16 जून 2026 को उसे एक व्यक्ति का फोन आया, जिसमें जमानत से संबंधित आवश्यक दस्तावेज लेकर मिलने को कहा गया। इसके बाद उसे जानकारी मिली कि उसके खिलाफ खुसरूपुर थाना में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।

उसका दावा है कि प्राथमिकी संख्या 209/2026 दिनांक 6 अप्रैल 2026 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है, जिसमें रंगदारी मांगने और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने जैसे आरोप शामिल हैं।

आरोपी पक्ष का कहना है कि उसने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए ग्रामीण पुलिस अधीक्षक से पर्यवेक्षण कराने की मांग की थी। बाद में उसे जानकारी मिली कि संबंधित अनुमंडलीय पुलिस पदाधिकारी द्वारा मामले का पर्यवेक्षण भी पूरा कर लिया गया है।

व्यक्ति ने सवाल उठाया है कि प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर पर्यवेक्षण प्रक्रिया पूरी होने तक उससे संपर्क क्यों नहीं किया गया और उसका पक्ष क्यों नहीं लिया गया। उसने इस पूरी प्रक्रिया को लेकर निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं।

हालांकि, मामले में थाना पुलिस और संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस का पक्ष प्राप्त होने के बाद उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

संबंधित व्यक्ति ने यह भी दावा किया है कि उसके खिलाफ एक अन्य मामला भी दर्ज है और वह कानूनी प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार है। उसने कहा कि वह जांच एजेंसियों के समक्ष उपस्थित होने से नहीं बच रहा है और कानून के अनुसार कार्रवाई का सामना करेगा।

नोट: यह समाचार संबंधित व्यक्ति द्वारा लगाए गए आरोपों और दावों पर आधारित है। मामले की वास्तविक स्थिति और अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

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