उत्तर प्रदेश के कन्नौज में निर्माणाधीन बिल्डिंग की छत गिरी, कई मजदूर दबे!

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उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में एक बड़ा हादसा हुआ है। यह हादसा कन्नौज रेलवे स्टेशन पर निर्माणाधीन नई बिल्डिंग के दौरान हुआ। गति शक्ति योजना के तहत इस स्टेशन की नई बिल्डिंग बनाई जा रही थी, जिसकी छत अचानक गिर गई। इस हादसे में कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए हैं। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे के समय निर्माण स्थल पर दर्जनों मजदूर काम कर रहे थे।


हादसे का विवरण

कन्नौज रेलवे स्टेशन पर नई बिल्डिंग का निर्माण कार्य गति शक्ति योजना के तहत चल रहा था। यह योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य रेलवे और अन्य बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाना है। निर्माण कार्य के दौरान अचानक छत गिरने से वहां काम कर रहे मजदूर मलबे के नीचे दब गए।

स्थानीय प्रशासन और राहत दल तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। हादसे के तुरंत बाद मलबे को हटाने के लिए क्रेन और अन्य भारी मशीनों का इस्तेमाल किया गया।


शुरुआती रिपोर्ट में क्या आया सामने?

घटना की शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया था। ठेकेदार और निर्माण एजेंसी पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या निर्माण सामग्री मानकों के अनुसार इस्तेमाल की गई थी।

कई मजदूरों ने बताया कि छत गिरने से पहले हल्की आवाजें सुनाई दे रही थीं, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया। कुछ मजदूर समय रहते बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन कई लोग मलबे के नीचे दब गए।


घायलों का हाल और अस्पताल की स्थिति

घटना के बाद घायल मजदूरों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि कई मजदूरों की हालत गंभीर है। घायलों का इलाज करने के लिए अतिरिक्त मेडिकल स्टाफ और संसाधनों को बुलाया गया है।


प्रशासन की प्रतिक्रिया

कन्नौज के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। जिलाधिकारी ने कहा कि प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को बचाने की है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि हादसे की पूरी जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


गति शक्ति योजना पर सवाल

गति शक्ति योजना को लेकर पहले से ही कई सवाल उठते रहे हैं। इस हादसे ने एक बार फिर इस योजना के तहत चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या परियोजना के तहत काम कर रही एजेंसियां अपने काम में लापरवाही बरत रही हैं? क्या सरकारी निगरानी तंत्र पर्याप्त है? ये सवाल अब चर्चा का विषय बन गए हैं।


राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस हादसे पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकार केवल योजनाओं की घोषणाएं करती है, लेकिन उनके क्रियान्वयन में लापरवाही बरती जाती है।

वहीं, सत्ताधारी दल ने कहा है कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने हादसे की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन करने की घोषणा की है।


स्थानीय लोगों की भूमिका

हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग भी बचाव कार्य में जुट गए। उन्होंने मलबे में फंसे मजदूरों को निकालने में मदद की। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में लापरवाही की शिकायत पहले भी की गई थी, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया।


भविष्य की तैयारी और सुरक्षा के उपाय

इस हादसे के बाद निर्माण कार्यों की सुरक्षा पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। सरकार को चाहिए कि वह निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियम बनाए और उनकी निगरानी करे। ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों को जवाबदेह ठहराने के लिए कड़े कदम उठाए जाने चाहिए।


निष्कर्ष

कन्नौज में हुआ यह हादसा एक चेतावनी है कि बुनियादी ढांचे के निर्माण में किसी भी तरह की लापरवाही जानलेवा हो सकती है। इस घटना से न केवल मजदूरों की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं, बल्कि सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े हुए हैं। उम्मीद है कि इस हादसे से सबक लेकर भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकेगा।


यह खबर लगातार अपडेट हो रही है। जैसे-जैसे नई जानकारी सामने आएगी, हम आपको इसके बारे में अवगत कराते रहेंगे।

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