कॉलेज में आयोजित इंडक्शन प्रोग्राम के दौरान विद्यार्थियों को आध्यात्मिकता, सकारात्मक सोच और आत्म-अनुशासन के महत्व से परिचित कराने के लिए प्रेरणादायक सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजयोगिनी बी.के. वंदना जी एवं बी.के. अमोद कुमार सिंह जी ने विद्यार्थियों को जीवन में मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और आत्म-नियंत्रण की भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
इस अवसर पर प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार और डॉ. प्रवीण कुमार भी मौजूद रहे। उन्होंने विद्यार्थियों के जीवन, शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और भविष्य से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए।
सकारात्मक सोच से बेहतर बन सकता है जीवन
सत्र के दौरान वक्ताओं ने बताया कि मन ही हमारे विचारों और कर्मों का आधार है। यदि मन को सकारात्मक विचारों से जोड़ा जाए और गलत गतिविधियों एवं नकारात्मक कार्यों से दूरी बनाए रखी जाए, तो जीवन को अधिक शांत, संतुलित और सफल बनाया जा सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को राजयोग, ध्यान, तनाव प्रबंधन, एकाग्रता, क्रोध नियंत्रण और सकारात्मक जीवनशैली जैसे महत्वपूर्ण विषयों के बारे में भी जानकारी दी। विद्यार्थियों को समझाया गया कि नियमित आत्मचिंतन और ध्यान के माध्यम से मन को नियंत्रित करने तथा अपनी कार्यक्षमता में सुधार लाने का प्रयास किया जा सकता है।
मोबाइल और सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर चर्चा
कार्यक्रम में आधुनिक जीवन में मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर भी विशेष चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि तकनीक आज जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, लेकिन इसका अत्यधिक और अनियंत्रित इस्तेमाल एकाग्रता, सोचने की क्षमता और मानसिक सक्रियता को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि मोबाइल और सोशल मीडिया का उपयोग आवश्यकता और उद्देश्य के अनुसार सीमित एवं संतुलित तरीके से किया जाना चाहिए। अनावश्यक और नकारात्मक ऑनलाइन गतिविधियों से दूरी बनाकर विद्यार्थी अपनी ऊर्जा को शिक्षा, कौशल विकास और रचनात्मक कार्यों में लगा सकते हैं।
मन पर नियंत्रण ही सफलता की कुंजी
प्रेरणादायक सत्र के दौरान विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि वास्तविक सफलता केवल बाहरी उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। सकारात्मक सोच, आत्म-अनुशासन, अच्छे कर्म और अपने मन पर नियंत्रण भी सफल एवं संतुलित जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं।
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को अपनी दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव लाने, तनाव को बेहतर तरीके से संभालने और जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। यह सत्र विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
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