साइबर ठगी से अर्जित रकम के दम पर गिरोह के सरगनाओं ने करोड़ों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया। जांच में सामने आया कि गिरोह के मुख्य आरोपित प्रतीक चौबे ने कैथई गांव में आलीशान मकान बनाया है और कई महंगी गाड़ियां खरीदी हैं। वहीं, दूसरे आरोपित रवि यादव ने भी लग्जरी वाहनों का बेड़ा तैयार किया, जिसमें शामिल एक थार वाहन को पुलिस ने सीज कर दिया है।

पुलिस जांच में यह भी पता चला कि गिरोह फर्जी फर्म ट्विनबिल्ड वेल और आरजे इंफ्रा के नाम से खोले गए बैंक खातों के माध्यम से साइबर ठगी की रकम का लेन-देन करता था। इन खातों का इस्तेमाल देशभर से ठगी गई धनराशि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जाता था।

साइबर सेल के ओम प्रकाश जायसवाल ने बताया कि ठगी के लिए साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए गए अधिकांश बैंक खाते आर्थिक रूप से कमजोर और निचले तबके के लोगों के नाम पर हैं।

आरोपित ऐसे लोगों को तय रकम या कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते अपने इस्तेमाल के लिए ले लेते थे और उन्हीं खातों के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन करते थे। कई खाताधारकों को इस बात का अंदाजा भी नहीं होता था कि उनके खाते का उपयोग साइबर अपराध में किया जा रहा है।पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता, फर्म या सिम कार्ड उपलब्ध न कराएं। किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की सूचना तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम पुलिस स्टेशन को दें।

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