आजकल एपस्टिन फाइल्स बहुत चर्चा में है………और इसकी वजह यह है कि यह सब तक पकड़ा गया सबसे बड़ा हाइ प्रोफाइल और घिनौना सैक्स रैकेट है…..
जिसमे पांच से चौदह साल की मासूम बच्चियों के साथ बस रेप ही नहीं हुआ बल्कि उन्हें चोट पहुंचाने के साथ मार कर खाया तक गया……..और यह सब करने वाले दुनिया के बेहद अमीर,ताकतवर और हाइ क्लास के लोग थे जो दिन के उजाले में इंसान और अंधेरे में शैतान बन जाते है।
लेकिन यह जो भी है वह तस्वीर का एक पहलू है तस्वीर का दूसरा पहलू किसी और ही तरफ इशारा करता है ….
पहला तो खुद एपस्टिन का इस सेक्स रैकेट को चलाने का मकसद……..
और दूसरा 2019 में खत्म हो चुके केस इस केस 20250में दुनिया के सामने दुबारा लाने का मकसद………
एपस्टिन एक यहूदी था,जो अपने प्राइवेट आइलैंड पर दुनिया के बड़े बड़े राजनेताओं और बिजनेसमैन सहित बड़े बड़े वैज्ञानिकों (जिसमें स्टीफन हॉकिंस भी शामिल थे)और बड़ी रिसर्चों या प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों को अय्याशी के नाम पर आमंत्रित करता था , और उनकी गंदी हरकतों के सबूत इकठ्ठा करता था…..
पहली नजर में यह नॉर्मल लगता है पर गहराई से देखे तो यह कोई जासूसी ट्रैप सा लगता है ,
यह हवस नहीं, यह ‘ब्लैकमेल’ का धंधा था
यह सिर्फ़ अय्याशी का अड्डा नहीं था, यह एक इंटेलिजेंस ऑपरेशन था। एपस्टिन की पार्टनर, घिसलेन मैक्सवेल के पिता (रॉबर्ट मैक्सवेल) का कनेक्शन इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद से से जुड़े थे
यानी मकसद साफ़ था—दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों (नेताओं/साइंटिस्ट्स) को ‘हनी ट्रैप’ में फंसाना, उनके वीडियो बनाना और फिर उनसे अपनी मर्जी के फैसले करवाना।
लेकिन यह एक अलग बात है……. लेकिन अब जिस तरह से एक खत्म हो चुके मामले को अचानक दुबारा खोला गया है और वह भी तब ,जब इसमें खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप सहित बिल क्विंटल और अमेरिकी बिलिनर बिल गेट्स का नाम शामिल हैं यह अपने आप में बहुत अजीब है
ऐसा लगता है जैसे जो हुआ वो भी एक साजिश थी और अब जो हो रहा है वह भी एक साजिश का हिस्सा है इतनी बड़ी साजिश की खुद अमेरिकी राष्ट्रपति और अमेरिकी रिचेस्ट मैन बिल गेट्स की भी इसमें नहीं चली और उनको भी इस चाल का मोहरा बनना पड़ा ……..
एपस्टिन फाइल्स का खुलना “सच्चाई की जीत” लगता है, तो यह एक भ्रम है सच तो यह है कि इन फाइलों को “मंज़ूरी” इसलिए दी गई क्योंकि अब इनका इस्तेमाल एक “हथियार” की तरह किया जा रहा है।
अगर आप ध्यान दें, तो इन फाइलों में सिर्फ़ “सच” नहीं है। इसमें हज़ारों “फर्जी” शिकायतें भी शामिल कर दी गई हैं।
मकसद……. जब सच और झूठ को मिक्सी में पीस दिया जाता है, और किसी विषय पर जानकारी अत्यधिक हो जाती हैं तो जनता “सच” पर भी यकीन करना छोड़ देती है।
जैसे अब जितने भी बड़े लोगों जैसे ट्रंप और बिल गेट्स ने इसे झुठला दिया
भले ही यह सबकी बदनामी हुई, लेकिन सजा किसी को नहीं हुई। “सब नंगे हैं” बोलकर असली गुनहगारों को भीड़ में छिपा दिया गया।
हमें माइकल जैक्सन,स्टीफन हॉकिंग, क्लिंटन और प्रिंस एंड्रयू जैसे नाम दिखाकर उलझाया जा रहा है।
लेकिन ज़रा गहरी नज़र से देखिये… यह लिस्ट ‘सच’ बताने के लिए नहीं, बल्कि ‘असली सच’ को हमेशा के लिए दफ़न करने के लिए आई है।
गौर कीजिये, कीचड़ उन पर उछाला गया जो या तो मर चुके हैं (हॉकिंग) या जिनका करियर ख़त्म हो चुका है (क्लिंटन/एंड्रयू)।
ये वो ‘प्यादे’ हैं जिनकी अब सिस्टम को ज़रूरत नहीं रही। इन्हें जनता के सामने फेंक दिया गया ताकि हम तालियां बजाएं कि “इंसाफ हो रहा है”।
सवाल यह है— जो आज सत्ता में हैं, उनके नाम कहाँ हैं? वो वीडियो टेप्स कहाँ हैं जो एपस्टिन के हर कमरे में रिकॉर्ड होते थे?
ऐसा लगता है इसमें डीप स्टेट का हाथ है जो पूरी दुनिया की इकानॉमी और ताकत को कंट्रोल करना चाहती है….
डीप स्टेट…..जो इतनी ताकतवर है अमेरिकी राष्ट्रपति भी उसके सामने बेबस है और अपना तमाशा दुनिया में बनते देखने को मजबूर…..
और अब भारतीय प्रधानमंत्री मोदी भी उनके निशाने पर लग रहे हैं, तभी तो बार बार उनका नाम इस मामले में उछाला जा रहा है पर इस मामले अब तक कुछ ठोस अभी तक नहीं दिखा,साफ दिख रहा है कि यह एक धमकी है हमारे इशारो पर चलो वरना तुम खत्म……
अब यह नहीं पता आने वाले समय में क्या सामने आएगा,वह जो भी हो,सिवाय इंतजार के हमारे पास कोई चारा नहीं है,और जो एक बार हमे पता होनी चाहिए कि किसी का चारा न बने…..
