अन्नदाता पर कुदरत की मार: बेमौसम बारिश से रीवा के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें

अविनाश चतुर्वेदी ✍️
रीवा/गुढ़। जिले में अचानक बदले मौसम के मिजाज ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सोमवार को गुढ़ समेत आसपास के अंचलों में हुई बेमौसम बारिश और छाए बादलों ने खेतों में खड़ी सोने जैसी फसल पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं। मौसम की इस करवट से उन किसानों के चेहरों पर मायूसी छा गई है, जिनकी साल भर की मेहनत अब कटाई की दहलीज पर है।
पककर तैयार फसल पर ‘आफत’ की बूंदें
क्षेत्र के किसानों ने बताया कि वर्तमान में राई (सरसों), मसूर और चना जैसी महत्वपूर्ण फसलें पूरी तरह पककर तैयार हो चुकी हैं। कई स्थानों पर कटाई का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा था, लेकिन अचानक शुरू हुए बारिश के सिलसिले ने काम रोक दिया है। किसानों का कहना है कि यदि बारिश की तीव्रता बढ़ती है या ओलावृष्टि होती है, तो हाथ में आई फसल मिट्टी में मिल सकती है।
भीगने से दाना काला होने का डर
कटाई कर चुके किसानों के लिए मुसीबत और भी बढ़ गई है। खलिहानों और खेतों में खुले में रखी फसल के भीगने से दाने के रंग और गुणवत्ता खराब होने की आशंका है, जिससे बाजार में सही दाम मिलना मुश्किल होगा। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि मौसम की स्थिति को देखते हुए फसलों के सुरक्षित भंडारण और संभावित नुकसान के आकलन पर ध्यान दिया जाए।
इनका कहना है:
“हमने दिन-रात एक कर फसल पाली थी, अब जब घर लाने का समय आया तो कुदरत रूठ गई। बारिश से मसूर और चने की फलियों के झड़ने और दाना खराब होने का सबसे ज्यादा डर है।”
शिवेन्द्र सिंह जरहा सरपंच एवं स्थानीय किसान, क्षेत्र गुढ़

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version