अजीज मित्र पोद्दार जी, मेरे शुभचिंतक, हृदयतल की गहराइयों से आभार व्यक्त करता हूँ, मेरे हर परिस्थिति, स्थिति में आपका स्नेह अपनापन और आत्मीय संदेश लगभग हर दिन संदेश से, दूरभाष से मिलता रहता है, सच कहूं मेरे पास अभिव्यक्ति के लिए कोई शब्द नहीं है, आपका मित्रवत ही नहीं बल्कि अपने सगे से भी ज्यादा लगाव, अपनापन शुरू से रहा है, और संघर्ष और दुःख की स्थिति में आपका एक एक शब्द मुझे संबल प्रदान करता है, निःसंदेह, निसंकोच कह सकता हूं कि मित्र हो तो आप जैसा, हम सदा आभारी हैं और आपका ऋण हम चुका नहीं सकते, मेरे दुःख की घड़ी में हर दिल हर पल आपका साथ मिलता है, जबकि आप हमेशा मुझे संघर्ष के लिए प्रेरित करते रहते हैं, सच में मित्र हो तो आप जैसा
आपका मित्र
श्याम

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