4 दिसंबर 1971 की वह रात इतिहास बन गई, जब यदुवंशी महायोद्धा कमोडोर बबरू भान यादव ने भारतीय नौसेना का नेतृत्व करते हुए दुश्मन के सबसे सुरक्षित समझे जाने वाले कराची बंदरगाह में घुसकर ऐसा प्रहार किया कि पाकिस्तान थर्रा उठा।

सन 1971… भारत-पाक युद्ध अपने चरम पर था। सीमा पर गोलियां गरज रही थीं, आसमान में लड़ाकू विमान दहाड़ रहे थे, लेकिन पाकिस्तान को भरोसा था कि उसका कराची बंदरगाह अजेय है। वही उसकी नौसेना की ताकत, तेल भंडार और युद्ध की जीवनरेखा था। इसी अभेद्य समझे जाने वाले किले को ध्वस्त करने की जिम्मेदारी मिली भारतीय नौसेना के महायोद्धा कमोडोर बबरू भान यादव को। उन्होंने समझ लिया था कि दुश्मन को हराना है तो उसकी शक्ति नहीं, उसकी सांस पर वार करना होगा। छोटी-सी मिसाइल बोट्स, सीमित दूरी, दुश्मन की एयरफोर्स और पकड़े जाने पर निश्चित मौत हर खतरा सामने था, फिर भी उन्होंने पीछे हटना नहीं चुना।

4 दिसंबर 1971 की काली रात… अरब सागर शांत था लेकिन भारतीय बेड़ा मौन संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा था। कमोडोर बबरू भान यादव के नेतृत्व में भारतीय टास्क फोर्स कराची के करीब पहुंची। जैसे ही दुश्मन रडार पर आया, आदेश गूंजा “फायर।” पहली मिसाइल ने पाकिस्तानी युद्धपोत PNS Khyber को आग के गोले में बदल दिया, दूसरी मार ने Muhafiz को समुद्र की गहराइयों में उतार दिया।

इसके बाद जो हुआ, वह पाकिस्तान की समुद्री ताकत के लिए प्रलय साबित हुआ। भारतीय मिसाइलें सीधे कराची के तेल भंडारों और ईंधन टैंकों पर गिरीं। हजारों टन तेल धधक उठा, आग इतनी भयानक थी कि लपटें कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रही थीं। पूरा बंदरगाह जलते हुए शहर जैसा नजर आ रहा था। पाकिस्तानी नौसेना के जहाज बंदरगाह छोड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाए, संचार व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई, आदेश देने वाले अधिकारी तक समझ नहीं पाए कि हमला किस दिशा से हुआ।

लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी थी। पाकिस्तानी वायुसेना जवाबी हमला कर सकती थी, एक गलती पूरे बेड़े को खत्म कर सकती थी। उसी क्षण बबरू भान यादव का अद्भुत नेतृत्व सामने आया। उन्होंने शांत दिमाग से दिशा बदली, गति बढ़ाई और अपने हर योद्धा को सुरक्षित वापस ले आए। सुबह जब सूरज निकला तो कराची जल रहा था और भारतीय नौसेना विजयी होकर लौट चुकी थी।

कराची, जो पाकिस्तान की आर्थिक और सैन्य जीवनरेखा था, अचानक ठहर गया। तेल सप्लाई बाधित हुई, नौसैनिक ऑपरेशन रुक गए और कई दिनों तक बंदरगाह पर काम बंद रहा। पाकिस्तानी नौसेना का मनोबल टूट गया जहाज खुले समुद्र में निकलने से डरने लगे। दुनिया के सैन्य विशेषज्ञ हैरान थे कि छोटी भारतीय मिसाइल बोट्स ने दुश्मन की सबसे बड़ी समुद्री शक्ति को घुटनों पर ला दिया।

इस अद्वितीय साहस और रणनीतिक प्रतिभा के लिए उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया और वे भारतीय नौसेना के पहले अधिकारी बने जिन्हें यह गौरव मिला। उस रात ने साबित कर दिया कि युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि नेतृत्व, साहस और संकल्प से जीता जाता है और समुद्र ने स्वयं देखा कि कमोडोर बबरू भान यादव जैसे महायोद्धा इतिहास नहीं पढ़ते, इतिहास रचते हैं।

🔥 कराची कांपा था, क्योंकि सामने भारत का शेर खड़ा था।
🇮🇳 जय हिंद | जय नौसेना | जय वीर यदुवंशी 🔱

✍️ Vishnu Yadav Commando

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