[29/05, 4:48 am] Manoj Kumar Dumara: सीता संवाद आध्यात्मिक एवं साहित्यिक यात्रा द्वारा अब तक सीता जन्मभूमि दर्शन यात्रा के दौरान रक्सौल पूर्वी चंपारण,सीतामढ़ी,मधुबनी, दरभंगा, धनुषा,जनकपुर, सर्लाही में कार्यक्रम हो चुके है।
सीतामढ़ी जिला के पुपरी ,डुमरा, बाजपट्टी,बथनाहा,सुरसंड,चोरौत,रुन्नी सैदपुर ,मेजरगंज, सीतामढ़ी नगर,, रीगा में सीता संवाद आध्यात्मिक एवं साहित्यिक यात्रा द्वारा मां सीता के जीवन चरित आधारित विचार गोष्ठी संगीत मय कार्यक्रम हुए है।
अब मिथिला परिक्रमा मिथिला दर्शन यात्रा की तैयारी में लग गया हूं।प्रभु की कृपा से माता सीता जन्मभूमि की आवाज को उद्देश्य को जन जन को पहुंचाने का संकल्प है।कोशी से गंडकी और हिमालय राज से गंगा का दिव्य दर्शन करना है।प्राचीन तिरहुत क्षेत्र का दिव्य दर्शन प्राप्त होगा।मिथिला की शान मैथिली है।हमसब मिलकर इसका दर्शन करेंगे।कोशी तट की आरती,समस्तीपुर,कटिहार,मुंगेर,सिमरिया घाट,राम रेखा घाट,हरिहरनाथ महादेव,वैशाली,मुजफ्फरपुर,शिवहर,मोतिहारी,बाल्मीकि नगर,बीरगंज,गढ़ी माई,गौर, मलंगवा,बर्दी बांस,जलेश्वर
विराट नगर में कार्यक्रम आयोजित किया जाना है।
माता सीता के जन्मभूमि का महत्व माता सीता के जीवन चरित पर व्याख्या मिथिला के महत्व तिरहुत क्षेत्र की भूमिका सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण संवर्धन हेतु प्रयास होगा।आप सभी का सहयोग अपेक्षित है।यह धार्मिक पुनर्जागरण का काल है।आध्यात्मिक उत्थान की पावन बेला है।सीता राम जी के जीवन चरित से राष्ट्र निर्माण का जयघोष होगा।जय सियाराम।
माता सीता जन्मभूमि पुनौरा धाम के सीता कुंड जल से संकल्पित होकर जगत जननी जानकी जी का आशीर्वाद लेकर मिथिला दर्शन यात्रा का शुभारंभ करूंगा।आप सभी का सहयोग अपेक्षित है।जय सियाराम।
आपका भाई
आग्नेय कुमार
निदेशक
सीता संवाद सीतामढ़ी
आध्यात्मिक एवं साहित्यिक यात्रा
जानकी जन्मभूमि पुनौराधाम सीतामढ़ी बिहार भारत
संपर्क सहयोग सुझाव 9162277579
[30/05, 10:48 am] Manoj Kumar Dumara: सभी पत्रकार मित्रों को प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सभी साथियों को पत्रकारिता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं मंगल कामना बधाईयां।जय सियाराम। लोकतंत्र के चौथे आधार स्तंभ बुलंद आवाज निष्पक्ष पत्रकारिता राष्ट्र की ताकत है।जब जब कलम की ताकत गूंजती है इतिहास करवट लेता है।प्रथम पत्रकारिता के गुरु भगवान नारद जी को प्रणाम।जो देवताओं के संदेश वाहक थे।जो सुर और असुर के मध्य जागकर निडरता से बात रखते थे।जो निर्भीक थे।स्पष्टवादी थे।निर्मल मन के ऋषि थे।सदा वीणा लिए भक्ति भजन में नारायण का सुमिरन कर काम करते थे।
वर्तमान चुनौति को स्वीकार कर सभी पत्रकार महोदय अभिभावक जिनसे विगत तीस वर्ष में बहुत कुछ सिखा हु।उन सभी को प्रणाम करता हूं।जिनकी लेखनी से क्रांति का सृजन हुआ उन सभी को नमन करता हूं।सभी अनुज पत्रकार मित्रों को साधुवाद धन्यवाद आभार जय सियाराम।आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना।सीता संवाद आध्यात्मिक एवं साहित्यिक यात्रा की ओर से खूब बधाई।जय हो
