ओमिक्रॉन का एक नया सब-वेरिएंट BA.3.2 23 देशों में पाया गया है। इसे ‘सिकाडा’ नाम दिया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि Covid-19 का एक नया वेरिएंट पूरी दुनिया में चुपचाप फैल रहा है। इसमें म्यूटेशन की संख्या असामान्य रूप से ज्यादा है, जिसकी मदद से यह मौजूदा इम्युनिटी को भी चकमा दे सकता है।

सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, इस वेरिएंट स्ट्रेन सबसे पहले नवंबर 2024 में दक्षिण अफ्रीका में पहचाना गया था और अब तक कम से कम 23 देशों में इसका पता चला है।

क्यों दिया गया सिकाडा नाम?

इसे सिकाडा वेरिएंट नाम दिया इसलिए दिया गया है, क्योंकि यह उस शोर मचाने वाले कीड़े की तरह ही सालों तक किसी की नजर में आए बिना अचानक बड़ी संख्या में सामने आया। BA.3.2 अपनी जेनेटिक विविधता के लिए जाना जाता है। इसके स्पाइक प्रोटीन में लगभग 70-75 म्यूटेशन होते हैं। स्पाइक प्रोटीन ही वायरस का वह हिस्सा है, जिसकी मदद से यह इंसानी कोशिकाओं से जुड़ पाता है।

सीडीसी ने बताया कि इसकी तुलना में, हाल ही में सामने आए दूसरे स्ट्रेन जैसे कि इसके पहले के वेरिएंट JN.1 और LP.8.1 के स्पाइक प्रोटीन में 30-40 म्यूटेशन ही होते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का क्या कहना है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये बदलाव इस बात को लेकर कुछ चिंताएं पैदा करते हैं कि वायरस का यह स्ट्रेन, पहले हुए संक्रमण या मौजूदा टीकों से मिली इम्युनिटी को कुछ हद तक चकमा दे सकता है।

नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी में फार्मेसी और हेल्थ सिस्टम साइंसेज के एसोसिएट क्लिनिकल प्रोफेसर ब्रैंडन डियोन ने कहा, “इसमें निश्चित रूप से काफी सारे म्यूटेशन हैं, इसलिए यह चिंता है कि मौजूदा वैक्सीन इसके लिए बहुत ज्यादा असरदार साबित नहीं होगी।”

क्या हैं इसके लक्षण?

BA.3.2 के लक्षण हाल के अन्य वेरिएंट्स जैसे ही लगते हैं, जिनमें गले में खराश, खांसी, नाक बंद होना, थकान, सिरदर्द और बुखार शामिल हैं। कुछ लोगों को पेट से जुड़ी समस्याएं, जैसे जी मिचलाना या दस्त भी हो सकते हैं।

CDC के अनुसार, लगभग 15 महीने पहले जब इसे पहली बार पहचाना गया था, तब से लेकर इस साल 11 फरवरी तक BA.3.2 वेरिएंट अमेरिका के कम से कम 25 राज्यों में 132 मॉनिटरिंग साइटों पर पाया गया है। यह जानकारी अमेरिका के वेस्टवॉटर सर्विलांस के जरिए मिली है। इसे अमेरिका के हवाई अड्डों पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों से लिए गए वॉलंटरी नेजल स्वैब सैंपल के जरिए भी पहचाना गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा प्रतीत नहीं होता कि “सिकाडा” स्ट्रेन अधिक गंभीर बीमारी या उच्च मृत्यु दर का कारण बनता है।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version